Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Ludhiana Bike Thieves Arrested: लुधियाना में वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश; हैबोवाल पुलिस ने 3 चोरी की ... Gurdaspur Crime News: गुरदासपुर में सरपंच के सूने घर में दिनदहाड़े हुई चोरी सुलझी; मुकेरियां का आरोप... SGPC vs Punjab Government: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से जुड़े कानून में बदलाव पर भड़के हरजिंदर सिंह ध... Ludhiana Vigilance Action: लुधियाना में विजिलेंस का बड़ा एक्शन; PSPCL के पूर्व CMD केडी चौधरी सहित 3... Bathinda Weather Alert: बठिंडा में गर्मी का भयंकर रूप, पारा 47 डिग्री पार; तपती धूप से पिघलने लगी सड... Punjabi Singer Khan Saab Injured: पंजाबी सिंगर खान साब शूटिंग के दौरान हुए हादसे का शिकार; सिर पर आई... Bahadurgarh PM Shri School: प्राइवेट स्कूलों पर भारी पड़ा बहादुरगढ़ का सरकारी स्कूल; 12वीं में 50 बच... Yamunanagar Court Decision: यमुनानगर में 3 साल की बेटी की हत्यारी मां को उम्रकैद; जज डॉ. सुखदा प्रीत... Kurukshetra Student Death in Canada: कुरुक्षेत्र के छात्र वीरेन रंगा की कनाडा में संदेहास्पद मौत; कम... Haryana Education Department: हरियाणा में सरकारी शिक्षकों-कर्मचारियों को झटका; 22 मई तक प्रॉपर्टी रि...

ट्रेड यूनियनों ने नए श्रम संहिताओं की निंदा की

केंद्र सरकार के नये श्रम कानूनों पर प्रतिक्रिया आय़ी

  • केंद्र सरकार ने जारी की है अधिसूचना

  • देश व्यापी प्रदर्शन करने की तैयारियां

  • यूनियनों ने कहा श्रमिकों को धोखा दिया

राष्ट्रीय खबर

भारत सरकार द्वारा दशकों में किए गए सबसे बड़े श्रम सुधारों को लागू करने की हालिया घोषणा ने देश के ट्रेड यूनियनों के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को, भारत के दस प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की, इसे श्रमिकों के खिलाफ एक भ्रामक धोखाधड़ी करार दिया। इन यूनियनों का मानना है कि ये नए श्रम संहिताएं कामकाजी वर्ग के हितों के खिलाफ हैं और उन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विरोधी पार्टियों से संबद्ध इन यूनियनों ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से सामने लाने के लिए बुधवार को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है।

मोदी सरकार ने लगभग पाँच साल पहले संसद द्वारा अनुमोदित चार श्रम संहिताओं को अब लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के समय से चले आ रहे कुछ पुराने और जटिल श्रम नियमों को सरल बनाना तथा देश में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है। सरकार यह दावा करती है कि ये बदलाव श्रमिक सुरक्षा और कल्याण में सुधार करेंगे। यह सत्य है कि ये नए नियम कुछ हद तक सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम-मजदूरी लाभों का विस्तार करते हैं, लेकिन इसी के साथ वे कंपनियों को कर्मचारियों को अधिक आसानी से काम पर रखने और निकालने की भी अनुमति देते हैं, जिससे यूनियनों की चिंताएँ बढ़ गई हैं।

ट्रेड यूनियनों ने पिछले पाँच वर्षों से इन प्रस्तावित परिवर्तनों का लगातार और कड़ा विरोध किया है, इस दौरान कई देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। यूनियनों का मुख्य विरोध उन प्रावधानों को लेकर है जो कर्मचारियों की सुरक्षा और सौदेबाजी की शक्ति को कमजोर करते हैं। नए नियमों के तहत, अब लंबी फैक्ट्री शिफ्ट और महिलाओं के लिए रात्रि-शिफ्ट की अनुमति दी गई है।

इसके अलावा, छंटनी या ले-ऑफ के लिए सरकारी पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता वाली फर्मों की सीमा को 100 कर्मचारियों से बढ़ाकर 300 कर्मचारी कर दिया गया है। यूनियनों का तर्क है कि यह सीमा वृद्धि बड़ी संख्या में श्रमिकों को अनिश्चितता के माहौल में धकेल देगी, क्योंकि अधिकांश फर्मों में कर्मचारियों की संख्या 300 से कम होती है, जिससे वे बिना किसी सरकारी रोक-टोक के छंटनी करने में सक्षम हो जाएँगी।

इस बीच, एसोसिएशन ऑफ इंडियन एंटरप्रेन्योर्स ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि नए नियम छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों के लिए परिचालन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे। यह दर्शाता है कि इन सुधारों पर हितधारकों के बीच व्यापक सहमति नहीं है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी है। मोदी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), जो एक दक्षिणपंथी यूनियन है, इन श्रम संहिताओं का विरोध नहीं कर रहा है। इसके विपरीत, बीएमएस ने राज्यों से इन संहिताओं को तत्काल प्रभाव से लागू करने का आह्वान किया है, जो यूनियनों के बीच एक वैचारिक विभाजन को रेखांकित करता है।

यह घोषणा भारत के श्रम बाजार के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहाँ सरकार निवेश और व्यापार में आसानी को प्राथमिकता दे रही है, जबकि यूनियनों का ध्यान श्रमिक सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा पर केंद्रित है। बुधवार को होने वाले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन से इस विवाद को एक नया आयाम मिलने की संभावना है।