अमेरिका पर निर्भरता कम करने की दिशा में दोनों पक्ष
ओटावाः अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है, जहां कनाडा तेजी से संयुक्त राज्य अमेरिका पर अपनी आर्थिक और सामरिक निर्भरता को कम करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसका मुख्य संकेत यूरोपीय संघ के साथ उसकी बढ़ती और गहरी होती साझेदारी है।
पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में शुरू की गई यह रणनीतिक पहल, अब प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में भी गति पकड़े हुए है। कार्नी सरकार ने यूरोपीय संघ के देशों के साथ व्यापार, सुरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में अपने संबंधों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। इस पहल के पीछे कई जटिल कारण हैं, जिनमें प्रमुख है अमेरिका-कनाडा व्यापार संबंधों में बार-बार आने वाला तनाव और कनाडा की अर्थव्यवस्था को अधिक विविधता प्रदान करने की इच्छा। कनाडा अब केवल अपने दक्षिणी पड़ोसी के विशाल बाजार पर ही निर्भर नहीं रहना चाहता।
इस नई रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ मुक्त व्यापार समझौता है, जिसे दोनों पक्ष अब रक्षा सहयोग और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विस्तार देने पर विचार कर रहे हैं। नाटो सदस्य होने के नाते, कनाडा और यूरोपीय देश पहले से ही रक्षा सहयोग साझा करते हैं, लेकिन अब इसे एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लचीलेपन को बढ़ाया जा सके।
कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच इस गहन जुड़ाव को विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम, निकल और कोबाल्ट) की आपूर्ति के संदर्भ में देखा जा रहा है, जो हरित ऊर्जा संक्रमण के लिए महत्वपूर्ण हैं। कनाडा चाहता है कि यूरोपीय निवेश और तकनीकी सहयोग के माध्यम से उसके स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा मिले।
अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक और व्यापारिक तनावों के बीच, कनाडा एक तटस्थ लेकिन मजबूत आर्थिक साझेदार की तलाश में है। यूरोपीय संघ के साथ यह साझेदारी कनाडा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक अधिक स्वतंत्र कूटनीतिक स्थान प्रदान करेगी और उसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी अपनी कूटनीति का विस्तार करने के लिए मजबूत आधार देगी।
प्रधानमंत्री कार्नी ने भी इस बात पर जोर दिया है कि कनाडा की विदेश नीति अमेरिकी हितों के अनुरूप होने के बजाय कनाडा के राष्ट्रीय हितों पर अधिक केंद्रित होनी चाहिए। कनाडा के इस कदम को वैश्विक सत्ता संतुलन को प्रभावित करने वाली एक दूरगामी राजनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है, जो पश्चिमी गुट के भीतर ही एक नए ध्रुवीकरण का संकेत देती है। आने वाले वर्षों में, कनाडा-और ईयू वैश्विक व्यापार और सुरक्षा वास्तुकला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।