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आर्किटेक्ट महाराज ने जंगल में बनवाई थी झलाई कोठी, 60 हजार में बेच दी थी हवेली

पन्ना: राजवंश परिवार पन्ना द्वारा 19वीं शताब्दी में बनाई गई हवेली पन्ना अमानगंज मार्ग पर स्थित है.अमझिरिया गांव के पास यह हवेली मुख्य मार्ग से करीब 5 किमी दूर पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन में स्थित है. इसे झलाई कोठी के नाम से जाना जाता है. यह हवेली पन्ना के महाराज भारतेंदु सिंह जू देव (नन्हे महाराज) ने बनवाई थी. महाराज खुद आर्किटेक्ट थे और उन्होंने लंदन में पढ़ाई की थी. इस हवेली को लंदन की पश्चिम शैली के साथ बुंदेलखंडी शैली में मिश्रित तौर पर बनाया गया है. इस हवेली के दरवाजों में लगे तालों पर मेड इन इंग्लैंड लिखा हुआ है.

60000 रुपए में खरीद ली थी हवेली

वर्तमान में इस हवेली के मालिक भूपेंद्र सिंह परमार बताते हैं कि “1977 में यहां पर घूमने आए थे, तब उन्होंने यह हवेली यहां पर देखी थी. इसके बाद उन्होंने अपने पिताजी को बताया कि जंगल के बीचो-बीच सुंदर हवेली है, जिसको हमें खरीदना चाहिए. इसके बाद पन्ना के तत्कालीन महाराज से इसकी बात की. 1978 में 60000 रुपए में बात तय हुई. जिसे हमने उन्हें 2 किस्तों में 30-30 हजार रुपए दिए और हवेली हमने खरीद ली.

इसके बाद इस हवेली को रिनोवेट कराया. पहले यहां पर बिजली भी नहीं थी और रास्ता भी नहीं था. जो बहुत ही कच्चा एवं पगडंडी नुमा था. उन्होंने अपने पैसों से यहां पर रास्ता बनवाया और बिजली के लिए भी उन्होंने मध्य प्रदेश के चीफ इंजीनियर से बात की और फिर यहां पर बिजली की लाइन डाली गई.”

रिनोवेट में खर्च हुए लाखों रुपए

भूपेंद्र सिंह परमार ने बताया कि “जब उन्होंने हवेली खरीदी तब यहां पर जंगल हुआ करता था और यहां पर सिर्फ 3 लोगों की झोपड़ियां बनी हुई थीं. जिसमें 9 लोग निवास करते थे. ये सभी हवेली के पास ही रहा करते थे. अब यहां पर कुछ बस्ती हो गई है. हवेली की स्थिति बहुत खराब थी. दरवाजे, खिड़की टूटे थे, दीवारें भी जर्जर हालत में थीं. हवेली में जीव जंतुओं का डेरा था. इसके बाद इसकी सफाई करवाकर सौंदर्यकरण का काम शुरू किया गया. जिस पर लाखों रुपए खर्च हुए थे. अभी यहां पिछले 40 साल से रह रहा हूं.

हवेली में हैं 27 कमरे

हवेली की लोकेशन बहुत ही सुंदर जगह पर है. यहां पर बुंदेलखंड की स्थानीय मूवी की शूटिंग भी हो चुकी है. इस हवेली में पहले बिजली नहीं थी. इसलिए इस हवेली के आगे तरफ 2 नाइट लैंप और पीछे तरफ भी 2 नाइट लैंप लगाए गए थे. इस हवेली का पोर्च भी बहुत ही शानदार बना हुआ है जो अमूमन अब देखने को नहीं मिलता है. इस हवेली में कुल 27 कमरे हैं, जिसमें 2 बेसमेंट में जमीन के नीचे भी कमरे बने हुए हैं. इस हवेली में ठंड के समय आग जलाने के लिए मुख्य कमरों में फायर चिमनी भी बनी हुई हैं. इसके लिए हवेली में बनाए गए टनल मौजूद हैं.