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स्वदेशी लेज़र डिफेंस सिस्टम अपग्रेड

भारतीय सेना को अब मिलेगी नई ताकत

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय सेना को अपनी हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण तकनीकी अपग्रेड मिलने जा रहा है। अब दुश्मन के ड्रोन भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने की हिम्मत नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उन्हें हवा में ही राख करने के लिए स्वदेशी तकनीक से विकसित अत्याधुनिक लेज़र डिफेंस सिस्टम तैनात किया जा रहा है। देश के प्रमुख रक्षा अनुसंधान संस्थान, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित यह प्रणाली भारतीय सेना और वायु सेना की सामरिक शक्ति में कई गुना वृद्धि करेगी।

रक्षा मंत्रालय के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, सीमा पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर के बाद के चरणों में दुश्मन के ड्रोन खतरों से निपटने के लिए कई कड़े और प्रभावी कदम उठाए गए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है, पूरी तरह से भारत में बना यह लेज़र-आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम।

इस परियोजना के पहले चरण में, थल सेना और वायु सेना को कुल 16 नए ड्रोन नष्ट करने वाले लेज़र हथियार सौंपे जाएंगे। डीआरडीओ के सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज द्वारा इस प्रणाली का सफलतापूर्वक विकास किया गया है, और इसके परीक्षण का अंतिम चरण भी पहले ही पूरा हो चुका है। सैन्य शब्दावली में इस प्रणाली को डायरेक्ट एनर्जी वेपन सिस्टम कहा जाता है।

इसका आधिकारिक नाम इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (मार्क 2) है। यह प्रणाली 10 किलोवाट की उच्च-शक्ति वाली लेज़र बीम का उपयोग करती है। यह बीम दुश्मन के ड्रोन को पलक झपकते ही निष्क्रिय या नष्ट करने में सक्षम है। इस मार्क 2 प्रणाली की मौजूदा मारक क्षमता दो किलोमीटर है, जो इसे सीमा पर मध्यम दूरी के ड्रोन खतरों से निपटने के लिए एक आदर्श हथियार बनाती है।

यह डीआरडीओ द्वारा सेना को दिए गए पिछले संस्करण से एक महत्वपूर्ण अपग्रेड है। इससे पहले, डीआरडीओ ने सेना को एक किलोमीटर की रेंज वाली लेज़र-नियंत्रित ड्रोन विध्वंस प्रणाली प्रदान की थी। मार्क II सिस्टम की तैनाती के साथ, भारतीय सुरक्षा बलों की हवाई निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमताएं और भी मजबूत होंगी।

इतना ही नहीं, डीआरडीओ अपनी इस तकनीक के अगले चरण पर भी काम कर रहा है। डीआरडीओ के सूत्रों ने बताया कि इसके अगले और अधिक शक्तिशाली संस्करण का परीक्षण प्रगति पर है। इस आगामी एंटी-ड्रोन लेज़र प्रणाली में 30 किलोवाट की लेज़र बीम का उपयोग होगा। यह उन्नत संस्करण अविश्वसनीय रूप से 5 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगा। इस तरह की उच्च मारक क्षमता वाली प्रणाली भविष्य में बड़े और तेज ड्रोन खतरों का सामना करने के लिए भारत को पूरी तरह तैयार कर देगी।

यह स्वदेशी लेज़र डिफेंस सिस्टम भारतीय सेना को न केवल एक मजबूत तकनीकी बढ़त प्रदान करेगा, बल्कि देश की रक्षा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। यह तकनीक सुनिश्चित करेगी कि भारतीय हवाई क्षेत्र हमेशा सुरक्षित रहे।