इक्वाडोर में संगठित आपराधिक गिरोहों का दहशत और बढ़ा
क्विटोः दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति गंभीर मोड़ ले चुकी है, जिसका ताजा प्रमाण राष्ट्रपति डेनियल नोबोआ के काफिले पर हुआ जानलेवा हमला है। हाल ही में, राष्ट्रपति की कार को निशाना बनाकर हमला करने की कोशिश की गई, जो इस बात को रेखांकित करता है कि देश में राजनीतिक अस्थिरता और संगठित आपराधिक गिरोहों का बढ़ता प्रभाव अब किस स्तर तक पहुँच गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला तब हुआ जब राष्ट्रपति नोबोआ का काफिला एक सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए जा रहा था। प्रदर्शनकारियों या अज्ञात हमलावरों के एक समूह ने राष्ट्रपति की सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, जिसमें गोलीबारी होने की खबरें भी सामने आईं। हालांकि, राष्ट्रपति नोबोआ बाल-बाल बच गए, लेकिन इस घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया।
हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पाँच हमलावरों को हिरासत में लिया। इस तरह सीधे देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि आपराधिक तत्वों में राज्य की सत्ता के प्रति भय लगभग समाप्त हो चुका है।
इक्वाडोर, जिसे कभी लैटिन अमेरिका के सबसे शांत देशों में गिना जाता था, अब हिंसक नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े गिरोहों के कारण हिंसा का केंद्र बन चुका है। मैक्सिको और कोलंबिया के ड्रग कार्टेल अब इक्वाडोर की भूमि का उपयोग कोकीन के परिवहन और वितरण के लिए कर रहे हैं, जिससे स्थानीय गिरोहों को ताकत मिली है। इन आपराधिक गिरोहों ने देश की जेलों और यहाँ तक कि सड़कों पर भी अपना दबदबा स्थापित कर लिया है।
डेनियल नोबोआ ने अपने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान और पदभार संभालने के बाद “ड्रग माफिया” और संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की कसम खाई थी। उन्होंने देश में आपातकाल की घोषणा कर सेना को इन गिरोहों के खिलाफ खुली छूट देने जैसे साहसिक कदम उठाए थे। नोबोआ के इन फैसलों ने सीधे तौर पर इन गिरोहों के हितों को चोट पहुँचाई, जिसके कारण उन पर खतरा लगातार बढ़ रहा था। यह हमला स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति की अपराध विरोधी मुहिम का जवाबी हमला हो सकता है।
राष्ट्रपति पर इस तरह का जानलेवा हमला देश के लोकतंत्र और कानून व्यवस्था की गंभीर नाजुकता को दर्शाता है। जब देश का मुखिया ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है। यह घटना इक्वाडोर के लोगों में असुरक्षा और भय की भावना को और गहरा करती है।
इसके अलावा, इक्वाडोर इस समय तेल की बढ़ती कीमतों और अन्य गंभीर आर्थिक संकटों का भी सामना कर रहा है। इन आर्थिक परेशानियों के बीच जनता का असंतोष भी बढ़ रहा है, जिसका फायदा आपराधिक और राजनीतिक तत्व उठाते हैं।
इस प्रकार, इक्वाडोर में संगठित अपराध, राजनीतिक अस्थिरता, और आर्थिक संकट का एक खतरनाक और विस्फोटक मिश्रण बन चुका है, जिसने देश को हिंसा के दलदल में धकेल दिया है। इस हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इक्वाडोर की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर और अधिक केंद्रित हो गया है।