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रूस ने कहा पांच हजार वर्ग किलोमीटर पर कब्जा

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब इस मुद्दे पर चुप है

मॉस्कोः रूस-यूक्रेन संघर्ष दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे लम्बी खिंचने वाली ख़बरों में से एक है, और हालिया घटनाक्रम इसकी जटिलता को और बढ़ाते हैं। ख़बरों के अनुसार, रूस ने दावा किया है कि उसने यूक्रेन के 5,000 वर्ग किलोमीटर के अतिरिक्त इलाके पर कब्जा कर लिया है।

यह दावा, यदि सही है, तो दिखाता है कि मोर्चे पर संघर्ष अभी भी रूस के पक्ष में जा रहा है, और यूक्रेन को पश्चिमी देशों से सैन्य सहायता मिलने के बावजूद उसे अपनी ज़मीन गँवानी पड़ रही है। इससे यूक्रेन पर जवाबी कार्रवाई करने और युद्ध को समाप्त करने के लिए राजनयिक समाधान खोजने का दबाव बढ़ेगा। यह घटना पश्चिमी देशों के लिए भी चिंता का विषय है, जो यूक्रेन को आर्थिक और सैन्य रूप से समर्थन दे रहे हैं।

इस बीच, रूस द्वारा अमेरिका को दी गई परमाणु परीक्षण (न्यूक्लियर टेस्ट) न करने की धमकी एक बड़ा भू-राजनीतिक विकास है। यह धमकी शीत युद्ध काल की याद दिलाती है और दर्शाती है कि दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव अपनी चरम सीमा पर है। रूस का यह कदम संभवतः अमेरिका द्वारा यूक्रेन को अधिक उन्नत हथियार देने की संभावनाओं को रोकने की एक कोशिश है। इस तरह की धमकियाँ अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के माहौल को अत्यधिक अस्थिर कर देती हैं और परमाणु संघर्ष की आशंका को बढ़ाती हैं, भले ही यह आशंका अभी बहुत कम हो।

एक अन्य महत्वपूर्ण और भावनात्मक ख़बर में, यूक्रेन ने दावा किया है कि रूस में पढ़ाई करने गया एक भारतीय नागरिक रूसी सेना के सामने सरेंडर कर दिया है। यह मामला अंतर्राष्ट्रीय कानूनों, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और युद्ध क्षेत्र में बाहरी लोगों की भूमिका पर सवाल खड़ा करता है।

यह स्पष्ट नहीं है कि भारतीय नागरिक रूसी सेना में कैसे और क्यों शामिल हुआ था, लेकिन यह घटना दर्शाती है कि युद्ध क्षेत्र में अनजाने में या बहकावे में आकर शामिल होने वाले लोगों की स्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है। भारत सरकार को इस मामले की पुष्टि करनी होगी और नागरिक की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी होगी।

इसके अलावा, अमेरिका में सरकारी शटडाउन का खतरा भी एक बड़ी अंतर्राष्ट्रीय ख़बर है। हालाँकि यह एक घरेलू अमेरिकी मुद्दा है, लेकिन इसका वैश्विक प्रभाव होता है। शटडाउन की स्थिति में, अमेरिकी सरकार के कई कर्मचारी बिना वेतन काम करते हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

ख़बरों में पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन की पुरानी नीति बदलने और वर्तमान बातचीत पर उनका रुख दर्शाया गया है। अमेरिका की आंतरिक राजनीति, विशेष रूप से राष्ट्रपति चुनाव से पहले, वैश्विक सहयोग, व्यापार समझौतों और अंतर्राष्ट्रीय सहायता कार्यक्रमों को प्रभावित कर सकती है। यह सारी खबरें इस बात को उजागर करती हैं कि दुनिया जटिल संघर्षों और अस्थिर राजनीतिक वातावरण से गुज़र रही है, जिसका प्रभाव दूर-दराज के देशों पर भी पड़ रहा है।