एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण ने नया निष्कर्ष प्रस्तुत किया
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः एक हालिया राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण ने उजागर किया है कि जीएसटी 2.0 के तहत दरों में की गई कटौती का अपेक्षित लाभ अधिकांश भारतीय उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँच रहा है। यह सुधार 22 सितंबर को लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य लगभग 80 वस्तुओं और सेवाओं को सस्ता बनाना था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव काफी असमान रहा है।
लोकल सर्किल्स द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में 332 जिलों के 27,000 से अधिक उपभोक्ताओं से 78,000 से अधिक प्रतिक्रियाएँ प्राप्त हुईं। सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चलता है कि कर कटौती का लाभ विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में अलग-अलग रहा है, जिसमें ऑटोमोबाइल क्षेत्र एकमात्र ऐसा सेगमेंट है जहाँ खरीदारों को महत्वपूर्ण और स्पष्ट लाभ मिला है।
आवश्यक वस्तुएं (पैकेज्ड खाद्य पदार्थ और दवाएं): उपभोक्ताओं को सबसे कम राहत इन्हीं श्रेणियों में मिली है। पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के मामले में, केवल 10 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने ही जीएसटी कटौती का पूरा लाभ मिलने की सूचना दी।
वहीं, लगभग 47 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें कीमतों में कोई कमी महसूस नहीं हुई। दवाओं के लिए भी स्थिति लगभग समान रही; केवल 10 प्रतिशत खरीदारों को पूर्ण लाभ मिला, जबकि 60 प्रतिशत से अधिक ने कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा।
सफेद वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरण: इन श्रेणियों में स्थिति थोड़ी बेहतर रही। लगभग 34 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने पूरी कटौती का लाभ मिलने की पुष्टि की। इसके अतिरिक्त, 33 प्रतिशत ने आंशिक लाभ मिलने की सूचना दी। ऑटोमोबाइल (वाहन): यह श्रेणी लाभ पहुँचाने में सबसे आगे रही।
सर्वेक्षण में शामिल 76 प्रतिशत कार खरीदारों ने पुष्टि की कि उन्हें जीएसटी कटौती का पूरा लाभ मिला है, जबकि 24 प्रतिशत को आंशिक लाभ प्राप्त हुआ। कारों, एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसी वस्तुओं पर जीएसटी दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था।
सर्वेक्षण ने स्पष्ट किया कि नीतिगत इरादे और वास्तविक उपभोक्ता अनुभव के बीच इस बड़े अंतर का मुख्य कारण खुदरा विक्रेताओं का व्यवहार है। कई खुदरा विक्रेता, चाहे वे ऑनलाइन हों या ऑफलाइन, अभी भी पुरानी अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) वाले स्टॉक को बेच रहे हैं। खुदरा विक्रेताओं का तर्क है कि पुराने स्टॉक पर नए कर लाभ को लागू करने से उन्हें इन्वेंट्री का नुकसान हो सकता है, जबकि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एमआरपी को अपडेट करना आवश्यक है।
सर्वेक्षण के अनुसार, इस सुधार का लाभ आम भारतीय खरीदार तक पहुँचाने के लिए प्रभावी प्रवर्तन और खुदरा विक्रेताओं के सहयोग की सख्त आवश्यकता है। जब तक ब्रांड और निर्माताओं द्वारा आपूर्ति श्रृंखला में उचित समन्वय स्थापित नहीं किया जाता है और छोटे खुदरा विक्रेता बिना किसी नुकसान के लाभ पास-ऑन नहीं करते, तब तक जीएसटी 2.0 का प्रभाव अधिकांश उपभोक्ताओं के लिए केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रहेगा।