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जलदापाड़ा के इलाकों में सैकड़ों पर्यटक फंसे

दार्जिलिंग और नेपाल का कहर अब उत्तर बंगाल पर बढ़ा

  • भूटान और हिमालय का पानी पहुंचा

  • अधिकांश पर्यटक ऐसे रिसॉर्टों में हैं

  • आदमी डूबने जितना पानी जमा है

राष्ट्रीय खबर

शिलिगुड़ीः दार्जिलिंग और मिरिक के बाद पहाड़ का पानी नीचे के इलाकों में पहुंच गया है। इसका नतीजा है कि उत्तर बंगाल के अनेक इलाके अब जलमग्न हो गये हैं। इस मौसम में दुर्गापूजा के मौके पर घूमने गये सैकड़ों पर्यटक जहां तहां फंस गये हैं। मिली जानकारी के मुताबिक जलदापाड़ा में सबसे बुरी स्थिति है। वहां के एक रिसॉर्ट के मालिक के यहां करीब चालीस पर्यटक फंसे हुए हैं। रिसॉर्ट मालिक के मुताबिक पिछले 12 सालों में ऐसी बुरी स्थिति कभी नहीं आयी, जहां बाहर से आये लोगों के साथ साथ स्थानीय लोग और मवेश तथा वन्यजीव भी फंस गये हैं।

उन्होंने बतायापर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है। कई पर्यटक अपनी कारों में घूमने आए थे। उनकी कुछ कारें पानी में बह गईं। एक और कार तैरते हुए एक पेड़ में फँस गई। वहां भी शनिवार शाम से लगातार बारिश हो रही है। शाम 7:30-8 बजे के आसपास बारिश शुरू हुई। रात होते-होते बारिश और तेज़ हो गई। सिसमारा नदी में पानी इतना बढ़ गया है कि जगह-जगह बाँध टूट गए हैं। वहाँ पानी भर रहा है। कहीं गर्दन तक पानी है, कहीं कमर तक या घुटनों तक। कई स्थानों पर एक व्यक्ति के डूब जाने जितना पानी भर गया है।

इस इलाके के हर कॉटेज और होमस्टे की पहली मंजिल में पानी घुस गया है। जनरेटर भी पानी में डूबा हुआ है। सभी पर्यटक यहीं फँसे हुए हैं। कोई भी बाहर नहीं निकल पा रहा है। रविवार दोपहर तक बचाव दल नहीं पहुँचा था। पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने में भी दिक्कत आ रही है। कई कॉटेज में अपनी गायें हैं। इस आपदा में उन मवेशियों की हालत भी दयनीय है। ऐसा लग रहा है कि गैंडे कभी भी जंगल से निकलकर सड़क पर आ सकते हैं।

इलाके के तमाम रिसॉर्ट के मालिक फ़िलहाल, नई बुकिंग के बारे में सोच भी नहीं रहे हैं। बाद में, कॉटेज और होमस्टे एसोसिएशन मिलकर तय करेंगे कि आगे के लिए बुकिंग करनी है या नहीं। हमारे यहाँ कॉटेज सिस्टम है। घर एक-दूसरे से जुड़े नहीं हैं। अब इस आपदा में एक घर से दूसरे घर तक खाना पहुँचाना भी मुश्किल हो गया है। इसके संचालक किसी तरह खिचड़ी बनाकर पर्यटकों तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।