Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal Case: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- जिनकी अपील मंजूर, वो दे सकेंगे वोट; बंगाल सरकार को बड... Drug Free Punjab: पंजाब को नशा मुक्त करने के लिए आगे आए युवा शक्ति, डॉ. कृष्ण गोपाल ने दिलाया बड़ा स... Punjab Heatwave: भीषण गर्मी के बीच पंजाब सरकार ने जारी की एडवायजरी, लू से बचने के लिए स्वास्थ्य विभा... Jalandhar News: जालंधर के पॉश इलाके में मॉल के बाहर लगी भीषण आग, इलाके में मची अफरा-तफरी LPG Gas Cylinder: 35 दिनों से गैस सिलेंडरों की ऑनलाइन बुकिंग ठप, रसोई का बजट बिगड़ा और जनता परेशान जालंधर में दर्दनाक हादसा: गोराया नेशनल हाईवे पर ट्रक ने एक्टिवा को मारी टक्कर, LPU से घर जा रहा युवक... पुलिस का बड़ा एक्शन: किराने की दुकान में चल रहा था काला खेल, छापेमारी में हुआ सनसनीखेज खुलासा; आरोपी... लुधियाना विक्रमजीत मामला: सास की अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर, कोर्ट की सख्त टिप्पणी- जांच में सहयोग ... सोने-चांदी की कीमतों ने पकड़ी रफ्तार! आज 16 अप्रैल को दिल्ली से मुंबई तक महंगे हुए जेवर, खरीदने से प... सांसद अमृतपाल सिंह की मुश्किलें बढ़ीं! पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, जानें याचिका में किन द...

अकड़ दिखाने वाले चुनाव आयोग की हवा निकाल दी अदालत ने

तो बिहार का एसआईआर रद्द कर देंगेः सुप्रीम कोर्ट

  • आयोग ने कहा था उसका एकाधिकार है

  • अदालत ने कहा पूरे देश पर प्रभाव पड़ेगा

  • अगली सुनवाई सात अक्टूबर को होगी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि अगर बिहार में होने वाले चुनावों के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली में कोई भी अवैधता पाई जाती है, तो वह पूरी प्रक्रिया को रद्द कर देगा।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ, जो इस सर्वेक्षण के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, ने कहा कि वह यह मानकर चल रही है कि चुनाव आयोग, एक संवैधानिक निकाय होने के नाते, एसआईआर प्रक्रिया के संचालन में कानून और अनिवार्य नियमों का पालन कर रहा है।

इससे पहले चुनाव आयोग ने अदालत को अपनी ताकत का एहसास कराने के मकसद से कहा था कि देश में चुनाव कराने संबंधी फैसला लेना चुनाव आयोग का अधिकार है और इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।

आज शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर कोई आंशिक राय देने से इनकार करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि उसका अंतिम फैसला पूरे भारत में एसआईआर प्रक्रिया के लिए एक उदाहरण बनेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में एसआईआर प्रक्रिया की वैधता पर अंतिम सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की है।

इससे पहले, 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए आधार को 12वें वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए। यह आदेश तब आया था जब शिकायतें मिली थीं कि चुनाव अधिकारी पिछले निर्देशों के बावजूद आधार को स्वीकार करने से इनकार कर रहे थे।

न्यायालय ने निर्वाचन आयोग की आपत्तियों को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि भले ही आधार नागरिकता साबित नहीं कर सकता, लेकिन यह पहचान और निवास का एक वैध प्रमाण बना हुआ है।

एसआईआर अभियान विपक्ष के निशाने पर आ गया है, जो आरोप लगा रहे हैं कि लाखों असली मतदाताओं के नाम बिना उचित सत्यापन के मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उनका तर्क है कि चुनाव आयोग द्वारा अनुमोदित 11 दस्तावेजों की सूची से आधार को बाहर करना मतदाताओं के लिए अनुचित है, क्योंकि आधार कार्ड अन्य आईडी की तुलना में कहीं अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध है। 18 अगस्त को, ईसीआई ने एक मसौदा सूची प्रकाशित की थी जिसमें दिखाया गया था कि एसआईआर प्रक्रिया के हिस्से के रूप में 65 लाख नाम हटा दिए गए हैं।

इस बीच, चुनाव आयोग ने विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों का खंडन किया है और राजनीतिक दलों पर मतदाताओं को गुमराह करने और दोष चुनाव निकाय पर डालने का आरोप लगाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी कहा है कि वे या तो अपने आरोपों के समर्थन में सबूत के साथ एक हलफनामा दाखिल करें या चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों के लिए सार्वजनिक माफी जारी करें।

सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर चल रहे विवाद को दर्शाता है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ पार्टी के इशारे पर लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि इस साजिश का उद्देश्य चुनाव परिणामों को प्रभावित करना है।