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राहुल गांधी ने पंजाब के बाढ़ प्रभावितों से भेंट की

ऐतिहासिक गुरुद्वारा बाबा बुड्ढा साहिब में मत्था टेका

  • अमृतसार के घोनेवाल गांव का दौरा किया

  • गुरदासपुर के डूब वाले इलाकों तक गये

  • पार्टी के वरिष्ठ नेता भी उनके साथ थे

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को अमृतसर में हाल की बाढ़ से तबाह हुए इलाकों का दौरा किया। उन्होंने आपदा से प्रभावित निवासियों से मुलाकात की और नुकसान का जायजा लिया। राहुल गांधी के साथ पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला और पार्टी के अन्य नेता भी थे।

उन्होंने सबसे पहले अमृतसर के अजनाला ब्लॉक के घोनेवाल गांव का दौरा किया, जो सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में से एक है। यहाँ उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ बैठकर सीधे बाढ़ से प्रभावित लोगों से बात की। इसके बाद, गांधी ने अमृतसर के रामदास में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा बाबा बुड्ढा साहिब में मत्था टेका और फिर गुरदासपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।

पंजाब इस समय दशकों की सबसे भयंकर बाढ़ का सामना कर रहा है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और स्थानीय वर्षा से सतलुज, ब्यास और रावी नदियों के साथ-साथ मौसमी नदी-नालों में आए उफान के कारण यह आपदा आई है। इस आपदा में 56 लोगों की जान चली गई है और 1.98 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं।

9 सितंबर को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और पंजाब के लिए 1,600 करोड़ रुपये की राहत सहायता की घोषणा की, जो पहले से आवंटित 12,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त है। इससे पहले, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, एल. मुरुगन और बी.एल. वर्मा भी स्थिति का जायजा लेने के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं।

गांधी का यह दौरा राहत और पुनर्वास प्रयासों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच हुआ है, क्योंकि राज्य जीवन, संपत्ति और कृषि को हुए व्यापक नुकसान से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता, प्रताप सिंह बाजवा ने राज्य सरकार से उन किसानों को प्रति एकड़ 20,000 रुपये का तत्काल मुआवजा जारी करने का आग्रह किया है, जिनकी फसलें हाल की बाढ़ में तबाह हो गई हैं। उन्होंने इस आपदा को दशकों में राज्य की सबसे भयंकर आपदाओं में से एक बताया।

बाजवा ने आप के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पर सहायता वितरण में देरी के लिए आलोचना की और कहा कि किसान सर्वेक्षण और ‘गिरदावरी’ (आधिकारिक क्षति आकलन) जैसी लंबी नौकरशाही प्रक्रियाओं का इंतजार नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा, पंजाब के खेत पानी और कीचड़ में डूबे हुए हैं, किसान बर्बादी की कगार पर हैं, फिर भी आप सरकार उनसे सर्वेक्षण और गिरदावरी का इंतजार करने को कह रही है।

बाजवा ने जोर देकर कहा, किसानों को आज तत्काल राहत की जरूरत है, न कि नौकरशाही बहाने की। प्रति एकड़ 20,000 रुपये का तुरंत भुगतान किया जाना चाहिए। उन्होंने दो-भागों में मुआवजे का पैकेज प्रस्तावित किया, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया कि उचित आकलन के बाद प्रति एकड़ 30,000 रुपये की दूसरी किस्त जारी की जाए, ताकि प्रभावित किसानों को कुल 50,000 रुपये प्रति एकड़ मिल सकें। उन्होंने अनुमान लगाया कि लगभग चार लाख एकड़ कृषि भूमि पानी में डूब गई है।

बाजवा ने आगे कहा, यह 800 करोड़ रुपये की तत्काल राहत कोई बड़ी मांग नहीं है, यह न्यूनतम जीवनरेखा है जिसके पंजाब के किसान अभी हकदार हैं।