ट्रंप के नाराजगी का लाभ उठाकर जेलेंस्की ने भी कहा
कियेबः रूस-यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल हो रहे रूसी ड्रोन में भारतीय घटकों की मौजूदगी के आरोपों ने भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा दिया है। यूक्रेन ने यह दावा किया है कि रूसी सेना द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के लिए उपयोग किए जा रहे ड्रोन में भारतीय निर्मित पुर्जे मिले हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की की सरकार ने इस ड्रोन घोटाले में ईरान को भी शामिल किया है, आरोप है कि तेहरान द्वारा डिज़ाइन किए गए रूसी ड्रोन में भारतीय घटकों का इस्तेमाल हो रहा है।
इस मामले में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत पर निशाना साधा है। उन्होंने अमेरिकी चेतावनियों के बावजूद रूस से तेल खरीदना जारी रखने के लिए भारत की आलोचना की है। ट्रंप ने कहा है कि भारत मॉस्को से तेल खरीद कर यूक्रेन पर हमलों के लिए रूस को प्रभावी रूप से वित्तीय सहायता दे रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि यूक्रेन के इन आरोपों के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत पर दबाव और बढ़ सकता है।
कई पश्चिमी मीडिया आउटलेट्स ने यूक्रेनी सेना की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि पिछले साल व्लादिमीर पुतिन की सेना के शाहिद-136 ड्रोन में भारतीय घटकों की मौजूदगी पाई गई थी। ज़ेलेंस्की की सरकार पहले ही इस बारे में नई दिल्ली और यूरोपीय संघ (ईयू) को सूचित कर चुकी है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूसी ड्रोन की वोल्टेज रेगुलेटर यूनिट में इंटरटेक्नोलॉजी द्वारा निर्मित ब्रिज रेक्टिफायर E300359 का उपयोग किया गया है। इसके अलावा, सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम में ऑरा सेमीकंडक्टर द्वारा निर्मित सिग्नल जेनरेटर चिप का भी इस्तेमाल हुआ है। यूक्रेन का आरोप है कि ये दोनों कंपनियाँ वास्तव में भारतीय हैं। इन आरोपों के कारण भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए दबाव का सामना करना पड़ सकता है।