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युद्ध का कारोबार और सुन त्ज़ु के सिद्धांत

चीनी जनरल और सैन्य विशेषज्ञ सुन त्ज़ु, जो 544 ईसा पूर्व से 496 ईसा पूर्व तक जीवित रहे, आज भी अपनी कृति युद्ध की कला के माध्यम से प्रासंगिक हैं। उनकी यह पुस्तक युद्ध की प्रकृति, विजय के मार्ग, रणनीति और आवश्यक कारकों पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। नेपोलियन, माओत्से तुंग, फिदेल कास्त्रो और जोसेफ स्टालिन जैसे दिग्गजों ने उनकी शिक्षाओं का अनुसरण कर सफलता प्राप्त की।

सुन त्ज़ु भले ही ईसा मसीह के जन्म से बहुत पहले अदृश्य हो गए, लेकिन उनकी किताब हजारों साल बाद भी, विशेषकर वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में, अत्यंत प्रासंगिक है। वर्तमान में, ईरान के परमाणु संयंत्र पर इजरायल के हमले के बाद पश्चिम एशिया में उपजा तनाव वैश्विक चिंता का विषय बन गया है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोधाभासी बयान और इजरायल-अमेरिका गठबंधन तथा ईरान-रूस-चीन धुरी के बीच बढ़ती खाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। फिलिस्तीन, लेबनान, इराक और यमन के चरमपंथी समूह, ईरान के इशारे पर छद्म युद्ध में शामिल होकर इजरायल को निशाना बना रहे हैं। इस जटिल स्थिति का विश्लेषण सुन त्ज़ु के युद्ध की कला में वर्णित पांच कारकों के आधार पर किया जा सकता है।

सुन त्ज़ु के अनुसार, सैनिकों और नागरिकों का अपने शासक में अटूट विश्वास होना चाहिए। हालांकि, वर्तमान में किसी भी पक्ष में यह पूर्ण समर्थन नहीं दिख रहा है। अमेरिकी नागरिक युद्ध नहीं चाहते, और कांग्रेस ने भी इसका विरोध किया। इजरायल में नेतन्याहू गाजा में आम नागरिकों के मारे जाने को लेकर जवाबदेही का सामना कर रहे हैं। ईरान में, हिजाब जैसे मुद्दों पर आंतरिक मतभेद के बावजूद, नागरिक बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ एकजुट हैं, जिससे ईरान इस पहलू में थोड़ा आगे है।

दूसरा है अनुकूल परिस्थितियों का लाभ उठाना, चाहे दिन हो या रात, गर्मी हो या सर्दी। इजरायल लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए है। उनका मुख्य लक्ष्य गाजा पर कब्ज़ा और हमास का उन्मूलन तो है ही, लेकिन वे ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना चाहते हैं, क्योंकि इससे पश्चिम एशिया में इजरायल का दबदबा खत्म हो जाएगा। ईरान भी धैर्य और सावधानी से काम ले रहा है, अमेरिकी उकसावे के बावजूद सीधे हमला नहीं कर रहा है। वे अपनी परमाणु अनुसंधान जारी रखे हुए हैं, जो इजरायल-अमेरिका को चिंतित कर रहा है। तीसरे का तात्पर्य युद्ध क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, दुश्मन की ताकत, सुरक्षा उपाय, जीवन-मृत्यु की संभावना और हमला करने के लिए उपयुक्त स्थानों का पूर्व-निर्धारण है।

इजरायल ने मोसाद और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की मदद से ईरानी ठिकानों की जानकारी जुटाई और बंकर बस्टर बमों से हमला किया।

हालांकि, ईरान ने अपने परमाणु प्रतिष्ठानों को जमीन के नीचे 500 मीटर से 1 किमी तक गहरा छिपा रखा है, जिससे उन्हें पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल हो रहा है।

ईरान भी अपने दुश्मनों के भूभाग का सर्वेक्षण करता रहा है, लेकिन क्या इजरायल-अमेरिका ईरान की क्षमताओं को कम आंक रहे हैं? चौथा कमांडर की स्थिरता, खुफिया जानकारी और रणनीति बदलने की क्षमता महत्वपूर्ण है। ईरान के सुप्रीम कमांडर खामेनेई शांत और निर्णायक हैं।

बेंजामिन नेतन्याहू आक्रामक हैं और अपनी जासूसी एजेंसी पर निर्भर हैं। डोनाल्ड ट्रंप अप्रत्याशित हैं, हालांकि उनके पास दुनिया का सबसे बड़ा शस्त्रागार है। इस युद्ध में रूस और चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, जो ईरान को परमाणु क्षेत्र में समर्थन दे रहे हैं ताकि पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन बना रहे।

ईरान की भौगोलिक स्थिति भी उसे हवाई हमलों के अलावा मुश्किल से हराने योग्य बनाती है। भविष्य में पुतिन और शी जिनपिंग की भूमिकाएं निर्णायक होंगी। पांचवा विषय अनुशासन का है। यह सेना के भीतर जिम्मेदारियों के बंटवारे, रणनीति के प्रति प्रतिबद्धता और पर्याप्त युद्ध सामग्री की आपूर्ति को दर्शाता है।

सुन त्ज़ु ने युद्ध की लागत को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया। अमेरिका को लागत की चिंता नहीं, क्योंकि युद्ध से उनके हथियारों की बिक्री बढ़ती है। ईरान भी आत्मनिर्भर हथियारों के साथ लागत को नियंत्रित कर रहा है, और रूस-चीन के समर्थन से उन्हें और मदद मिलेगी। हालांकि, इस युद्ध से वैश्विक ऊर्जा अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

ट्रंप का लक्ष्य ईरान में अमेरिका समर्थित शासन का उदय है, इजरायल पश्चिम एशिया में सर्वोच्च शक्ति बनना चाहता है और गाजा-वेस्ट बैंक पर कब्जा करना चाहता है, जबकि ईरान एक नई परमाणु शक्ति के रूप में उभरकर शक्ति संतुलन स्थापित करना चाहता है। सुन त्ज़ु के समय परमाणु हथियार नहीं थे, लेकिन अब वे मौजूद हैं। एक गलत कदम तीसरे विश्व युद्ध और बड़े पैमाने पर विनाश का कारण बन सकता है। अब इन तमाम विषयों के बीच यह सवाल है कि हथियारों के इस्तेमाल से उसका बाजार बढ़ रहा है तो जाहिर तौर पर जो हथियार बना रहा है, उसे कारोबारी लाभ हो रहा है।