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इंटरनेट पर भारतीय जासूसों को लालच देती थी एक महिला

गुप्तचर एजेंसियां मैडम एन की तलाश में जुटी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय नेट इंफ्लुएंसर्स को पाकिस्तानी जासूस बनाने का लालच देती थी मैडम एन। कौन है ये रहस्यमयी पाक महिला? भारत-पाकिस्तान तनाव के माहौल में पिछले एक महीने में एक के बाद एक जासूस पकड़े गए हैं! इनमें से कुछ नेट इंफ्लुएंसर हैं, तो कुछ सरकारी अधिकारी। इन सभी पर भारत की सुरक्षा से जुड़ी अहम और संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान में तस्करी करने का आरोप है।

उस माहौल में इस बार मैडम एन नजर में आयी हैं। लाहौर, पाकिस्तान के इस कारोबारी का काम भारतीय नेट इंफ्लुएंसर्स को पाकिस्तानी जासूस बनाने का लालच देना था, ऐसा आरोप है। एक रिपोर्ट में मैडम एन का मामला सामने आया है। पता चला है कि महिला का पूरा नाम नोशाबा शहजाद है। वह पाकिस्तान के लाहौर में एक ट्रैवल एजेंसी की प्रमुख है। गिरफ्तार भारतीय नेट इंफ्लुएंसर्स उसके सहारे पाकिस्तान गए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नोशाबा पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी आईएसआई के तहत काम करती थी। आईएसआई में उसका कोड नाम मैडम एन है।

उसने हाल ही में गिरफ्तार भारतीय नेटीजन ज्योति मल्होत्रा ​​जैसे कई अन्य लोगों को पाकिस्तान जाने में मदद की। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार लोगों से पूछताछ में इस रहस्यमयी व्यक्ति का नाम कई बार सामने आया है। यह भी पता चला है कि मैडम एन कम से कम 500 जासूसों का स्लीपर सेल बनाने की कोशिश कर रही थी, ताकि वे भारत के विभिन्न हिस्सों से पाकिस्तान को गुप्त सूचनाएं भेज सकें।

इसके लिए नोशाबा सबसे पहले भारतीय नेटीजनों को पाकिस्तान जाने का इंतजाम करती। उसके बाद धीरे-धीरे उन्हें पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के अधिकारियों से मिलवाती। इस तरह नोशाबा ने कथित तौर पर पिछले छह महीनों में करीब 3,000 भारतीय नागरिकों और 1,500 अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को पाकिस्तान जाने में मदद की।

यह भी पता चला है कि नोशाबा दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास के वीजा विभाग के संपर्क में भी थी। नोशाबा वहां के प्रथम सचिव (वीजा) सोहेल कमर और काउंसलर (कॉमर्स) उमर शेरियार के करीबी संपर्क में थी। सूत्रों का कहना है कि नोशाबा के एक फोन कॉल से किसी भी व्यक्ति का वीजा मंजूर हो जाता था।

मैडम एन के इशारे पर पाकिस्तानी उच्चायोग भारतीय नागरिकों को पाकिस्तान जाने के लिए विजिटर वीजा जारी करता था। इस तरीके से पाकिस्तान जाने वालों से नोशाबा मोटी रकम वसूलती थी। पूरा पैसा पाकिस्तान के लिए दुष्प्रचार के काम में लगाया जाता था। इतना ही नहीं, नोशाबा आईएसआई के सक्रिय सदस्य दानिश उर्फ ​​एहसान-उर-रहमान के संपर्क में भी थी। यह सारी जानकारी सामने आने के बाद ही जांचकर्ता सक्रिय हुए। इस बात की जांच की जा रही है कि मैडम एन की मदद से कोई और भारतीय तो पाकिस्तान नहीं गया।