Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Mandla Crime: मंडला में रिश्तों का कत्ल! पिता के साथ मिलकर बेटे ने की मां की हत्या, रोंगटे खड़े कर दे... Ishaan Khatter Video: रेस्टोरेंट से बाहर निकलते ही गिराई कॉफी, सफेद पैंट हुई खराब तो पैपराजी के सामन... NSA Ajit Doval Riyadh Visit: अजीत डोभाल ने रियाद में सऊदी विदेश मंत्री और क्राउन प्रिंस के करीबियों ... Bank Holiday Today: अक्षय तृतीया के बाद आज भी बंद रहेंगे बैंक? जानें 20 अप्रैल को किन राज्यों में रह... Motorola Edge 70 Pro Launch: 22 अप्रैल को लॉन्च होगा मोटोरोला का नया फोन, 6500mAh बैटरी और 144Hz डिस... PBKS vs LSG: श्रेयस अय्यर ने छोड़े इतने कैच की टोपी से छिपाना पड़ा मुंह, शर्मिंदगी का VIDEO सोशल मीड... Chardham Yatra 2026: अक्षय तृतीया के शुभ योग में शुरू हुई चारधाम यात्रा; जानें केदारनाथ-बद्रीनाथ के ... Chatra News: चतरा में दर्दनाक हादसा, तालाब में डूबने से मां और दो बेटियों की मौत; चंद मिनट में उजड़ ... Police Action: SP की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान हंसना ASI को पड़ा भारी, अनुशासनहीनता के आरोप में ... Postmaster Suicide: सट्टे के कर्ज में डूबे पोस्टमास्टर ने दोस्त के घर दी जान, लेनदारों के दबाव में ख...

बाढ़ में आयी थी लकड़ी से बनी मूर्तियां

साढ़े तीन सौ वर्षों की प्राचीन पूजा का अलग इतिहास

  • तत्कालीन जमींदार को सपना आया था

  • वाकई बाढ़ में बहकर आयी थी यह प्रतिमा

  • जमींदारी प्रथा के बाद भी जारी है परंपरा

राष्ट्रीय खबर

 

कोलकाताः दुर्गा पूजा खास तौर पर पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है। चारों तरफ इस पूजा की धूम के बीच ही अनेक ऐसे इतिहास इस पूजा आयोजन से जुड़े होते हैं जो हमें आश्चर्यचकित कर देते हैं। कुछ ऐसा ही इतिहास डायमंड हार्बर के पारुलिया गांव की पूजा का है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस पूजा से जुड़ी कहानी रोचक है।

लगभग 350 साल पहले की कहानी। तब अविभाजित 24 परगना में डायमंड हार्बर के विशाल क्षेत्र में बाढ़ आ गई थी। कथित तौर पर, बाढ़ के पानी ने मंडल परिवार के घर की इमारत की एक संरचना को बहा दिया, जिसे डायमंड हार्बर के पारुलिया गांव के जमींदार घर के रूप में जाना जाता है।

सुनने में आता है कि पारुलिया के तत्कालीन जमींदार काली कुमार मंडल को स्वप्न आया कि वह घर में तैरते हुए ढांचे से मां की पूजा करें। तभी से सबसे पहले डायमंड हार्बर के पारुलिया गांव के मंडल परिवार में मां दुर्गा की पूजा शुरू हुई। तत्कालीन अविभाजित 24 परगना के डायमंड हार्बर में सबसे पहले जमींदार काली कुमार मंडल ने मां दुर्गा की पूजा शुरू की थी।

पूजा के अवसर पर विभिन्न स्थानों से लोग इस जमींदार के घर एकत्र होते थे। पूजा के कुछ दिनों के दौरान, आसपास के विभिन्न स्थानों से लोग मंडल हाउस में एकत्रित होते थे। जमींदार के घर के सामने एक पालकी घर है।

इस घर के दुर्गा दालान के एक तरफ एक गुप्त रास्ता था। मालूम होता है कि उस समय घर की औरतें ऐसे बाहर नहीं निकलती थीं।इसलिए परिवार की महिलाएं दुर्गा दालान के गुप्त मार्ग से मां की पूजा करती थीं।

अब वो अतीत हो गए हैं। पारुलिया के मंडल परिवार में आज भी दुर्गा पूजा की खुशी गायब है, परिवार के लोग रीति-रिवाज के अनुसार मां दुर्गा की पूजा कर रहे हैं। यह कहानी भी प्रचलित है कि अगर पूजा बंद कर दी गई तो परिवार में कई परेशानियां आ जाएंगी।

इसलिए, पारुलिया के मंडल परिवार के पास जमींदारी नहीं होने के बावजूद, हर साल मंडल परिवार के सदस्य मां दुर्गा की पूजा करते हैं। दुर्गा पूजा के अलावा, परिवार के सदस्य पूरे वर्ष दुर्गा दालान में दिन में दो बार पूजा करते हैं। 350 साल पुरानी पारुलिया मंडल परिवार की दुर्गा पूजा संरचना आज भी मौजूद है।

दरअसल जमींदारी प्रथा चले जाने के बाद इस परिवार की आर्थिक आयोजन अब बड़े स्तर पर पूजा की नहीं रही है। परिवार के लोग भी अपने अपनी पारिवारिक जरूरतों की वजह से इधऱ उधर हो गये हैं। देख रेख के अभाव में आस पास की इमारतें ढह गयी हैं। फिर भी टूटे हुए जमींदार के घर में माँ दुर्गा की पूजा को लेकर उत्साह कम नहीं हुआ है। पूजा के कुछ दिनों के लिए, परिवार के सदस्य जहां भी हों, एक साथ एकत्र होते हैं।