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कुछ ना कहो कुछ भी ना कहो

किसकी चर्बी से कितने भक्तों को कौन सा प्रसाद खिला दिया, इस पर हुजूर लोग चुप है। यही तो पॉलिटिकल मजबूरी है। आंध्र प्रदेश के दोनों बड़े दल अपने खेमा में है। एक जिसने आरोप लगाया है और दूसरा जिसपर तिरुपति के प्रसाद में पशु चर्बी मिलाने में भागीदारी का आरोप है।

जुबां खोली तो दोनों में से कोई एक नाराज हो जाएगा, फिर लोकसभा नहीं राज्यसभा में भारी दिक्कत हो जाएगी। बेचारे मोदी जी इस बार की कम सीट की मजबूरी में अइसा फंसे हैं तो जहां बोलना चाहिए थे, वहां नहीं बोल पा रहे हैं।

अजीब बात है कि उनके अलावा भी जितने मुंह के बल्लम थे, उनकी जुबान को भी लकवा मार गया है क्योंकि उन्हें भी पता है कि जुबान फिसली तो सरकार सरकी। इस मौके पर अगर केंद्र में सरकार सरक गयी तो पता नहीं कितनो की शेष जिंदगी जेल में ही बीत जाएगी।

बहुत डेंजर है दोनों तरफ। अब आंध्र प्रदेश में चंद्राबाबू नायडू और जगन रेड्डी के झगड़े में केंद्र सरकार को तो दांव पर नहीं लगाया जा सकता। जी हां महाराष्ट्र में मोदी जी ने गणेश पूजा का उल्लेख कर अपना पूरा बचाव किया और राहुल गांधी को हिंदू विरोधी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

यह दांव भी उल्टी पड़ गयी क्योंकि नेता प्रतिपक्ष ने तिरुपति के लड्डू में पशु चर्बी मिलने की घटना पर भी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग कर दी और कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था के साथ ऐसा खिलवाड़ भविष्य में नहीं हो, इसका ख्याल रखा जाए।

इस विवाद पर अपने रांची का एक पुराना मामला याद आ गया। जो पुराने लोग हैं, उन्हें याद होगा कि यहां भी डालडा में पशु चर्बी का मामला कुछ ऐसा उछला था कि मंदिरों में इस बारे में खास हिदायत जारी कर दी गयी थी।

वइसे बाद में यह पूरा मामला ही रफा दफा हो गया। खैर राजनीति और व्यापार का गठजोड़ तो चलता रहता है। चंदा दो और धंधा लो, अब स्थापित सत्य है।

इसी बात पर एक चर्चित फिल्म 1942, ए लव स्टोरी का यह गीत याद आने लगा है। इस बेहतरीन गीत को लिखा था जावेद अख्तर ने और संगीत में ढाला था राहुल देव वर्मन ने। इसे कुमार सानू और लता मंगेशकर ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल इस तरह हैं।

कुछ ना कहो कुछ भी ना कहो

कुछ ना कहो कुछ भी ना कहो

क्या कहना है क्या सुनना है

मुझको पता है तुमको पता है

समय का ये पल  थम सा गया है

और इस पल में कोई नहीं है

बस एक मैं हूँ बस एक तुम हो

कुछ ना कहो  कुछ भी ना कहो

कितने गहरे हल्के  शाम के रंग हैं छलके

पर्वत से यूँ उतरे बादल  जैसे से आंचल ढलके

कितने गहरे हल्के  शाम के रंग हैं छलके

पर्वत से यूँ उतरे बादल  जैसे से आंचल ढलके

और इस पल में  कोई नहीं है

बस एक मैं हूँ  बस एक तुम  हो

कुछ ना कहो कुछ भी ना कहो

सुलगी सुलगी साँसें  बहकी बहकी धड़कन

महके महके शाम के साये  पिघले पिघले तन मन

सुलगी सुलगी सांसें  बहकी बहकी धड़कन

महके महके शाम के साये  पिघले पिघले तन मन

और इस पल में  कोई नहीं है

बस एक मैं हूँ  बस एक तुम हो

कुछ ना कहो  कुछ भी ना कहो

क्या कहना है क्या सुनना है

मुझको पता है तुमको पता है

समय का ये पल  थम सा गया है

और इस पल में  कोई नहीं है

बस एक मैं हूँ  बस एक तुम हो

खैर हरियाणा और जम्मू कश्मीर के बाद महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव का नंबर लगने वाला है। झारखंड की बात करें तो भाजपा के तमाम प्रदेश स्तरीय नेता अब लगभग किनारे लगा दिये गये हैं।

केंद्र से शिवराज सिंह चौहान और गुवाहाटी से हिमंता बिस्वा सरमा आये दिन कुछ इस तरह मंडरा रहे हैं मानों यही उनका घर हो और साप्ताहिक छुट्टी के दिन वह अपने घर आ रहे हैं।

बेचारे पूरी मेहनत तो कर रहे हैं पर टिकट की चाह रखने वाले सारे लोग संघ से प्रशिक्षित नहीं हैं। इसलिए इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि टिकट नहीं मिलने की स्थिति में बगावत नहीं होगा।

हरियाणा का हाल तो हम सभी देख ही रहे हैं, जहां पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के अपने घर में टूट हो गयी है। हालात वहां ठीक नहीं लगते और वहां का किला भी टूटा तो एक एक कर बाकी किले टूटते चले जाएंगे, इसका अंदाजा भाजपा के दूसरे नेताओं को भी है।

इसलिए सही फैसला है कि जहां गाड़ी फंसने का खतरा हो वहां चुप रह जाने में ही भलाई है। वरना पता नहीं लोग अब पुराने वीडियो निकालकर क्या क्या दलीलें देने लगते हैं। अयोध्या के राम मंदिर के उदघाटन में भी यही लड्डू बंटा है तो धार्मिक वर्ग किससे नाराज हुआ होगा, यह समझने वाली बात है।