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बंदोबस्त है बंदोबस्त है .. .. ..

बंदोबस्त है या करना है कि तैयारी में हर पॉलिटिकल पार्टी जी जान से जुटी हुई है। दरअसल लोकसभा का चुनाव करीब आ रहा है। अच्छी बात है कि यही तो एक मौका है जब देश के मैंगो मैन की याद आती है। वरना पांच साल तो दूसरे एजेंडा पर काम होता है। इस बार सरकार की हालत थोड़ी अच्छी है क्योंकि प्रभु श्री राम की कृपा है। अयोध्या के आयोजन का स्वाद पूरे देश के चखा है और उसका असर कुछ ना कुछ तो होना ही है। फिर भी यह राहुल गांधी इस जीत के रास्ते में लगातार कांटे बिछा रहा है। मजबूरी में दूसरों को भी अपने साथ जोड़ना पड़ रहा है वरना दावा तो अबकी बार चार सौ पार का पहले ही कर दिया गया था।

लेकिन यह 2024 राष्ट्रीय आम चुनाव है। दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी 400 सीटें मिलने का दावा कर रही है। उनके समर्थक मीडिया वाले भी यही ढोल बजा रहे हैं। लेकिन यह चार सौ सीटें कहां से आयेंगी, यह बड़ा सवाल है। 2019 के चुनाव में भाजपा ने अकेले 303 सीटें जीतीं थी यानी उसे चार सौ पार जाने के लिए और 97 सीटें चाहिए।

अब देश की हालत पर गौर करें। कुल 545 सीटों में से दक्षिण भारत की 129 सीटों को अलग कर दें तो बाकी बचे 416 सीट। इनमें से भाजपा के पास जो सीटें नहीं हैं, उनमें पश्चिम बंगाल-22, पंजाब -13, उड़ीसा-12, असम-3, कश्मीर-3, महाराष्ट्र-23, उत्तर प्रदेश-17 और अन्य छोटे राज्य कुल मिलाकर 17 सीटें हैं। यानी इस बार अगर भाजपा को 400 सीटें लानी हैं तो बाकी लगभग सभी पार्टियों को शून्य सीटें लानी होंगी। वहीं, अगर विपक्ष और भाजपा की सहयोगी पार्टियां 2019 की अपनी स्थिति बरकरार रख पाती हैं तो 303 भी नहीं बचेगी वह घटकर 290 हो जायेगा।

अब मूल बात पर आते हैं कि गठबंधन है या नहीं, अगर विपक्ष मौजूदा स्थिति को बरकरार रखते हुए अपनी सीटें 50 तक बढ़ा सकता है, तो भाजपा की सीटें कहां जा रही हैं। 240 तक। हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, ओडिशा या कर्नाटक में सीटें कम नहीं होंगी। लेकिन जो शुरुआत ईवीएम से हुई है उस पर भरोसा किया जा सकता है! नहीं इसलिए इंडिया गठबंधन तोड़ो. विपक्षी दल के नेता और मुख्यमंत्री को जेल में डालो और इस तरह आखिरी दिन की शुरुआत होगी। अब तो भारत रत्न का खेल भी समझ में आने लगा है।

इसी बात पर गुलजार की फिल्म हु तू तू का यह गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखने के बाद संगीत में ढाला था विशाल भारद्वाज ने और इसे स्वर दिया था रूप कुमार राठौर ने। गीत के बोल इस तरह हैं।

बंदोबस्त है जबरदस्त है बंदोबस्त है जबरदस्त है

बंदोबस्त है बंदोबस्त है बंदोबस्त है बंदोबस्त है

खून की खुशबू बड़ी बदमस्त है हमारा हुक्मरा अरे कमबख्त है

बंदोबस्त है जबरदस्त है बंदोबस्त है जबरदस्त है

बंदोबस्त है बंदोबस्त है बंदोबस्त है बंदोबस्त है

खून की खुशबू बड़ी बदमस्त है हमारा हुक्मरा अरे कमबख्त है

समय बराबर कर देता है समय के हाथ में आरी है

वक़्त से पंगा मत लेना वक़्त का पंजा भरी है

समय बराबर कर देता है समय के हाथ में आरी है

वक़्त से पंगा मत लेना वक़्त का पंजा भरी है

सिंग हवा के आंधी है ये जड़ों के टाँके कट जायेंगे

काल कुल्हाड़ी न पकड़ो काल की अरे काल की

लाठी बड़ी ही सख्त है बंदोबस्त है

हमारा हुक्मरा अरे कमबख्त है

जो मिट्टी में उगते है उनको दफ़ना के क्या होगा

जो नंगे तन जीते है उनको कफना के क्या होगा

दफ़न करो ना मिट्टी में  छाडे है अपनी मिट्टी है

मिट्टी में दिल बोये है हम उगते है मिट्टी में

कोख की हारे कोख की मुट्ठी बड़ी ही सख्त है

बंदोबस्त है जबरदस्त है बंदोबस्त है बंदोबस्त है

बंदोबस्त है बंदोबस्त है

खून की खुशबू बड़ी बदमस्त है

हमारा हुक्मरा अरे कमबख्त है।

इसके बाद भी दो पड़ोसी देशों की हालत देखकर यहां के हुक्मरानों को भी हालत समझ लेना चाहिए। जब म्यांमार में सैन्य शासन लागू हुआ तो माना गया था कि जनता को कुचलकर यह शासन अब स्थायी तौर पर कायम हो चुकी। अब हालत यह है कि वहां के सैनिक ही भाग भागकर दूसरे देशों में जा रहे हैं। उधर पाकिस्तान में सेना की मदद से नवाज शरीफ की जीत पक्की मानी जा रही थी। सोचा था जेल में बंद इमरान खान क्या कर सकते हैं। अब परिणाम सामने आया तो वहां की सेना भी हैरान है। इंडिया का मैंगो मैन भी बड़े कमाल का है, कब किसे पटखनी दे दे, कोई नहीं कह सकता।