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पर्दे के पीछे क्या है, यह मुख्यमंत्री ही बतायेंगे

  • पुलिस मुख्यालय में ही सवाल खड़े हो गये

  • डीजीपी के नेतृत्व में आखिर क्या गड़बड़ी

  • पैरवी पुत्रों की चर्चा क्यों आखिर तेज हो गयी

दीपक नौरंगी

पटना: बिहार में इन दिनों पुलिस महकमें इन दिनों में प्रतिनियुक्ति का रहस्यमय खेल आईएएस और आईपीएस अधिकारी में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरभंगा रेंज में आईजी की प्रतिनियुक्ति में पर्दे पीछे की क्या सच्चाई है आखिर चौबीस दिनों में तीन-तीन बार डीजीपी साहब के टेबल से आदेश क्यों निकल गया। इसका मतलब सरदार पटेल भवन में सब कुछ बेहतर नहीं है।

राज्य सरकार के मुखिया नीतीश कुमार को ध्यान देना होगा कि सरकार की छवि पर इसका असर पड़ता दिखेगा। क्योंकि आम जनता और पुलिस महकमें में लोग यही समझेंगे कि जिस अफसर पास पैरवी है वह बिहार में कुछ भी कर सकता है। इससे राज्य सरकार की छवि आम जनता के बीच कहीं ना कहीं खराब होगी।

दरभंगा रेंज के आईजी ललन मोहन प्रसाद 31 अक्टूबर को रिटायर हो गए। फिर डीजीपी ने एक आदेश निकाला कि बी एस ए पी के आई जी राजेश कुमार को दरभंगा रेंज में प्रतिनियुक्त किया जाता है।

फिर 13 नवंबर को डीजीपी साहब यह आदेश वापस लेते हैं और फिर एक आदेश निकाला जाता है कि आईजी हेड क्वार्टर विनय कुमार को दरभंगा रेंज में प्रतिनियुक्त किया जाता है। आईजी हेडक्वार्टर के अतिरिक्त जिम्मेदारी सीआईडी के आईजी पी कन्नन साहब को दी जाती है।

यहां तक बहुत ज्यादा कुछ भी रहस्यमय नहीं लग रहा था लेकिन रहस्यमय जब लगने लगा कि जब तीस नवंबर को डीजीपी साहब ने फिर आदेश निकाला की विनय कुमार को वापस आईजी हेड क्वाटर बुलाया जाता है और उनके स्थान पर मुजफ्फरपुर आईजी पंकज सिन्हा को दरभंगा रेंज की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाती है।

फिर आईएएस और आईपीएस समय समय में कई तरह की चर्चाएं हो रही है। सरकार के मुखिया नीतीश कुमार को गंभीरता पूर्वक इस बिंदु पर ध्यान देना चाहिए कि आखिर बार-बार इस प्रतिनियुक्ति के खेल के पीछे की सच्चाई क्या है। सवाल यह उठ गया है कि डीजीपी साहब को यही करना था तो पहले ही आईजी मुजफ्फरपुर को दरभंगा रेंज की अतिरिक्त जिम्मेदारी क्यों नहीं दी।

देखिये यह वीडियो रिपोर्ट

आईजी के पद की गरिमा होती है यदि डीजीपी साहब को यह आदेश सबसे पहले ही निकल चाहिए था कि मुजफ्फरपुर आईजी पंकज सिन्हा को दरभंगा रेंज की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाती है। इस पर भी सवाल उठ सकता है क्योंकि 31 दिसंबर को पंकज सिन्हा रिटायर कर जाएंगे। तो ऐसे में सारे रहस्यमय खेल खत्म हो जाते और सवाल नहीं उठता जब स्थाई तौर पर दरभंगा रेंज में आईजी की पोस्टिंग कर दी जाती।

सुशासन की अपनी छवि बनाने वाले बिहार के मुखिया नीतीश कुमार को पुलिस महक में हो रहे यह सारे खेलों के पीछे की सच्चाई जानी चाहिए। पूरे बिहार के पुलिस महकमें कई रिटायर और नाम चिन्ह आईपीएस अधिकारी में यह चर्चा है कि सिपाही की पोस्टिंग में भी बिहार में ऐसा कभी नहीं हुआ।

इतने कम दिनों के अंतराल में आईजी जैसे महत्वपूर्ण पद में प्रतिनियुक्ति का खेल समझ से परे है। कई रिटायर हो चुके आईपीएस अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि 35 से 30 वर्षों तक पुलिस में महकमें में आईपीएस पद पर कई कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई लेकिन सिपाही का तबादला भी इतना जल्दी हम लोगों ने नहीं देखा है।