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विद्रोहियों से हार रही है म्यांमार की सेना

  • भारत के दरवाजे तक आ पहुंचा युद्ध

  • सैनिक भागकर शरण ले रहे हैं यहां

  • रखाइन राज्य से चालीस हजार विस्थापित

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : म्यांमार में सेना और विद्रोही गुटों के बीच चल रहा सशस्त्र संघर्ष गंभीर होता जा रहा है। इस जंग में अब सेना के गुटों की तरफ से हवाई हमले भी शुरू हो गए हैं जिससे म्यांमार के लोग अपनी जान बचाने के लिए भारत आ रहे हैं।म्यांमार में सेना और विद्रोही गुटों के बीच चल रहे सशस्त्र संघर्ष का देशभर में बुरा असर पड़ रहा है।

हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार इस संघर्ष की वजह से रखाइन राज्य में 10,000 हज़ारों लोग विस्थापित हो गए हैं।म्‍यांमार में सत्‍ता पर काबिज सरकारी सेना और विद्रोहियों के बीच भीषण युद्ध जारी है। आलम यह है कि बड़ी संख्‍या में म्‍यांमार की सेना के जवान जान बचाकर भारत भागने को मजबूर हो गए हैं। दोनों के बीच यह लड़ाई भारत के लिए बड़ी चिंता का सबब बन गया है। दरअसल, ताजा लड़ाई भारतीय सीमा के पास हो रही है।

इससे बड़ी तादाद में म्‍यांमार के लोग भी भारत में शरण ले रहे हैं। इस बीच म्‍यांमार की सैन्‍य सरकार के कार्यकारी राष्‍ट्रपति मिंत श्‍वे ने चेतावनी दी है कि उनका देश कई भागों में बंट सकता है। म्‍यांमार की सेना को ताजा हिंसा में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है और उसे देश के कई हिस्‍सों से पीछे हटने को मजबूर होना पड़ा है।म्यांमार में सेना, जिसे जुंटा भी कहते हैं, शासन चलाती है। पर म्यांमार में पिछले कुछ समय से सैन्य शासन को विद्रोही गुटों से जबरदस्त चुनौती मिल रही है।

सेना और विरोधी गुटों के बीच जमकर लड़ाई चल रही है। यहाँ 3 शक्तिशाली जातीय सशस्त्र समूहों ने मिलकर आक्रामक नेतृत्व किया है और हाल के हफ्तों में कई शहरों और सैन्य चौकियों को अपने कब्जे में ले लिया है जिसमें चीन की सीमा से लगे क्षेत्र भी शामिल हैं। यह 2021 के तख्तापलट के बाद से सैन्य शासन के प्रतिरोध में सबसे बड़ी जीत बताई जा रही है।

इस वजह से म्यांमार सेना ने भी अपने हमलों को तेज़ कर दिया है। म्यांमार के कई हिस्सों में हिंसा चल रही है जिसका असर देश की जनता पर भी पड़ रहा है। हिंसा की वजह से विस्थापित लोगों की भी कमी नहीं है।हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार म्यांमार में सेना और विद्रोही गुटों के बीच चल रही लड़ाई के चलते रखाइन राज्य में 40 हज़ार से ज़्यादा लोग विस्थापित्त हो गए हैं। और यह सिर्फ इस हफ्ते की लड़ाई का नतीजा है।

यूनाइटेड नेशन्स ने इस बात की जानकारी दी है।म्‍यांमार के सैन्‍य राष्‍ट्रपति ने लोगों से अपील की है कि वे सेना का समर्थन करें लेकिन जनता उनकी अपील पर कोई ध्‍यान नहीं दे रही है। एशिया टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक म्‍यांमार की आबादी साढ़े 5 करोड़ है और इनमें से ज्‍यादातर लोग सेना की हार से खुश हो सकते हैं।

ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि म्‍यांमार की सेना अब आम नागरिकों को भी निशाना बना रही है। म्‍यांमार में सेना ने फरवरी 2021 में आंग सांग सू ची को हटाकर सत्‍ता पर कब्‍जा कर लिया था। इसका आम जनता ने जोरदार विरोध किया और यही से हिंसक संघर्ष की शुरुआत हो गई।