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दस विपक्षी दल पीएम से मिलना चाहते हैं

  • आदिवासियों की मांग पर बड़े पैमाने पर जनाक्रोश

  • जमीन पर सामाजिक विभाजन अब भी जारी है

  • टॉम्बिंग ने सरकार को दिया था 2 हफ्ते का अल्टीमेटम

  • राज्यपाल से मिले दस राजनीतिक दलों के नेता

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : मणिपुर में हिंसा को सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन कुकी-मेइतेई संघर्ष अभी तक धीमा नहीं हुआ है। इसके बावजूद मणिपुर में कुकी संप्रदाय के लिए अलग प्रशासन, अलग मुख्यमंत्री और अलग डीसी एसपी की आदिवासी कुकी संप्रदाय के नेताओं की मांग पर देशभर में जनाक्रोश है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आज बताया कि मणिपुर पुलिस ने भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के आरोप में एक आदिवासी संगठन के वरिष्ठ नेता मुआन टोम्बिंग के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आज बताया कि टोम्बिंग ने कहा था कि कुकी समुदाय का अलग मुख्यमंत्री और अधिकारी होंगे, चाहे केंद्र सरकार उन्हें मान्यता दे या नहीं दे।

टोम्बिंग ने यह भी कहा कि पिछले महीने योजना बनाई जा रही है कि तेंगनोउपल, कांगपोकपी और चुराचांदपुर जिलों में कूकी समुदाय के लोगों द्वारा ही शासन किया जाएगा। इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) के महासचिव मुआन टोम्बिंग के खिलाफ गुरुवार को जिले के चुराचांदपुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

टोम्बिंग के खिलाफ आईपीसी की धारा 121ए, 124ए, 153ए और 120 बी के तहत उन अपराधों जिनमें भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश या युद्ध छेड़ने का प्रयास करना या युद्ध छेड़ने के लिए उकसाना, देशद्रोह, दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाना और आपराधिक साजिश शामिल है।

यह एफ आई आर चुराचांदपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी एन थांगज़मुआन द्वारा दायर की गई थी। मणिपुर सरकार ने इसको लेकर बयान दिया है कि इस तरह के बयान की कोई अहमियत नही है । इसका कोई संवैधानिक आधार नहीं है। गुरुवार को बैठक के बाद मणिपुर सूचना विभाग द्वारा जारी कहा गया कि यह एक गैरजिम्मेदाराना बयान है। यह राज्य की कानून-व्यवस्था को खराब करने और लोगों को परेशान करने की एक साजिश है।

दूसरी ओर, मणिपुर में हिंसा के बाद उपजे तनाव के बीच 10 विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की मांग की है। इन 10 पार्टियों के प्रतिनिधियों ने 17 नवंबर को राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात कर कहा कि वे राज्य में जारी हिंसा पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री से मिलना चाहते हैं।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद पार्टियों ने कहा,10 दलों के नेताओं ने संकल्प लिया है कि वह हिंसा का उनके मार्गदर्शन में समाधान खोजेंगे। हम चाहते हैं कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया जाए। अगर प्रधानमंत्री व्यस्त हैं तो हम उनसे दिल्ली जाकर मुलाकात करने के लिए तैयार हैं।

मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ओ इबोबी सिंह ने कहा कि हमारा मानना है कि प्रधानमंत्री ही राज्य में शांति लाने की एकमात्र उम्मीद हैं।कांग्रेस नेता सिंह ने कहा, मणिपुर में जारी यह जातीय संघर्ष बीते 6 महीने से अधिक समय से चल रहा है। इसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई है और 60 हजार लोगों का आंतरिक विस्थापन हुआ है। लोग राहत शिविरों में अमानवीय स्थिति में रह रहे हैं। राज्य सरकार के खिलाफ लोगों के बीच का अविश्वास का माहौल है। सिर्फ केंद्र सरकार ही इस अविश्वास को रोक सकती है।