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सरकार के अपने दीपक तले फैला रहा अंधेरा

  • अच्छे अच्छे अफसरों ने टेक दिये हैं घुटने

  • बड़े नेताओँ के नाम का होता है इस्तेमाल

  • एक आईपीएस से लिया पंगा तो बात निकली

दीपक नौरंगी

पटना: राज्य सरकार ने विकास कार्य पर निगरानी रखने के लिए अपने खास कहे जानेवाले एक दीपक को लगा रखा है। वह दीपक प्रकाश देने के बदले पूरे राज्य में भ्रष्टाचार का एक खेल खेल रहा है जिस खेल को सभी जान रहे हैं लेकिन किसी की हिम्मत नहीं है कि राज्य के मुखिया को उसे दीपक के भ्रष्टाचार की पूरी खेल की जानकारी दे पाए।

बताया जाता है कई केंद्रीय जांच एजेंसी की नजर उक्त दीपक के कार्य शैली पर है। दीपक का खजाना भर रहा है या किसी और का यह तो चर्चाएं होती रहती है लेकिन राज्य में एक दीपक काफी सुर्खियों तो जरूर बटोर रहा है इसे इनकार नहीं किया जा सकता है। इस दीपक के लौ से कार्बन डाइआक्साइड नहीं भ्रष्टाचार की गैस निकल रही है।

जो भी अधिकारी इस गैस से दूर भागते हैं उन्हें किसी ना किसी रूप में प्रभावित कर दिया जाता है। हालत यह हो गई है कि अधिकारी बिहार छोड़कर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भागने की तैयारी में जुट जाते हैं। आईएएस और आईपीएस में महकमें यह चर्चा है कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने इस दीपक की लौ को और तेज कर दिया है।

इसका मुख्य काम पार्टी फंड के लिए पैसों की वसूली करना रह गया है। यह दीपक अपनी औकात भूलकर पुलिस महकमे के एक वरीय पदाधिकारी से टकरा कोशिश करते रहता है। पुलिस पदाधिकारी पर गलत दबाव बनाने के लिए अनावश्यक रूप से उसे अपने चेंबर में आने का दबाव बनाता था। जिससे कि अधिकारी समझे कि यह राज्य सरकार के मुखिया का सबसे करीबी है।

एक दिन उक्त पुलिस पदाधिकारी ने उसके आका के समक्ष ही यह सवाल उठा दिया कि उन्हें अनावश्यक रूप से बार-बार क्यों बुलाया जाता है और उसने वहां जाने से इन्कार कर दिया। अब दीपक की लॉबी उक्त आइपीएस अधिकारी को भेदने में लगी है। अधिकारी को यह बात समझते देर नहीं लगी।

अपनी ईमानदार छवि और कठोर फैसले के लिए जाने जानेवाले उक्त पुलिस पदाधिकारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे बिहार छोड़ना पसंद करेंगे लेकिन चाटुकारिता करना पसंद नहीं करेंगे। सत्ता के खासे करीब रहनेवाले इस दीपक की लौ को बुझाने की हिम्मत अच्छे-अच्छे पदाधिकारियों की तो बात छोड़िए मंत्री और विधायकों में भी नहीं है।

अपने उल्टे-सीधे कामों को जायज करवाने के लिए मंत्री को भी उसी दीपक के लौ तले जाना पड़ता है। जबसे उक्त वरीय पुलिस पदाधिकारी ने इस दीपक को झटका दिया है तबसे इनकी बोलती बंद है। अब इनकी लॉबी उक्त पदाधिकारी को बदनाम करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है।

चर्चा तो यह भी है कि इस हरकत से नाराज पुलिस पदाधिकारी दो-चार महीने में बिहार को टा-टा बाय-बाय कहते हुए केंद्र की प्रतिनियुक्ति पर चले जाएंगे। उक्त अधिकारी के पक्ष में विपक्षी दल के नेताओं ने भी सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। अब सरकार पर निर्भर करता है कि वह दीपक की बाती को उसकाए या फिर उसकी लौ को कम करने का कोई प्रयास करे।