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कांग्रेस संगठन में प्रभारी के बयानों से ही फैल रही नाराजगी

  • मंत्रियों को बदलने के मुद्दे पर दो बयान

  • सम्मेलन में भी नहीं मिला बोलने का मौका

  • पदाधिकारियों के चयन की नाराजगी ग्रास रूट तक

रांचीः झारखंड सरकार में कांग्रेस कोटे के मंत्रिपरिषद में फेरबदल की चर्चा कोई नई बात नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर यह बातें बार बार करते रहते हैं।पूर्व के प्रभारी आरपीएन सिंह भी जब रांची आते थे तो माहौल बनाने के लिए कांग्रेस कोटे के मंत्रियों के साथ बैठक करते थे और मीडिया में बयान देकर मंत्रीपरिषद में फेरबदल की बातें करते थे।

उसी राह में अविनाश पांडे भी चल रहे है, फरवरी 2022 में जब प्रभारी ने मंत्रियों के कार्यों को लेकर बातें की थी तो कार्यकर्ताओं ने आई गई बात समझकर उसे भुला दिया लेकिन 5 अप्रैल को जिस अंदाज में उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने मंत्रियों को अपमानित किया है उससे पार्टी का बड़ा नुक्सान आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा ।

दरअसल प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी के क्रियाकलाप को लेकर काफी आक्रोश है।समय समय पर यह आक्रोश बाहर भी आता है लेकिन इसे दबा दिया जाता है और कहा जाता है कि उचित प्लेटफॉर्म में अपनी बातों को रखें।

कांग्रेस के नेता बताते है कि प्रदेश कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक रांची के लालगुटवा बैंक्वेट हॉल में हुआ था और वह उचित प्लेटफॉर्म था जहाँ अपनी बातों को रखा जा सकता था, लेकिन प्रदेश प्रभारी ने योजनाबद्ध तरीके से किसी को बोलने का मौका नहीं दिया। इतना ही नहीं चार बार के विधायक,मंत्री व सांसद रहे फुरकान अंसारी बोलने के लिए खड़े हुए तो उनसे माइक छीन लिया गया।उसके पहले संगम गार्डेन में नवनियुक्त प्रदेश डेलीगेट की बैठक में भी कुछ डेलीगेट ने अपनी बात रखनी चाही तो उनको डांटकर व अनुशासन का डर दिखाकर बैठा दिया गया।

कांग्रेस अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी संगठन के निर्माण में किसी वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श नहीं किया और न सुझाव ली और नां ही उनको कोई अहमियत दिया और मनमाने तरीके से जिलाध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस कमेटी का गठन कर लिया गया, जबकि नियमत: प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन और जिला अध्यक्षों के गठन में वरिष्ठ नेताओं के सुझाव हर परिस्थिति में लिए जाते हैं और उनकी राय से कमिटियों का गठन किया जाता है।

लेकिन झारखंड में सबकुछ नजर अंदाज करते हुए मनमाने तरीके से जिला अध्यक्ष और प्रदेश पदाधिकारियों का गठन कर लिया गया, नतीजा 24 जिलों में विरोध प्रदर्शन हुआ, पुतला दहन हुआ, हाथापाई हुई, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का 50 हजार रुपया लूट लिया गया,कालिख पोता गया और ऐसा नजारा पूर्व में कभी देखने को नहीं मिला था।

कांग्रेस के सैकड़ों समर्पित कार्यकर्ताओं और नेताओं ने इस परिस्थिति में सुधार और संगठन में योगदान देने वालों को स्थान देने की मांग की जिससे दबाने के लिए दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और सिर्फ तीन वरिष्ठ नेता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोर नाथ शाहदेव और डॉ राजेश गुप्ता छोटू को निलंबित किया गया।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी की मुलाकात में क्या बातें हुई ये बात सिर्फ वही दोनों जानते हैं। झामुमो ने अपना उम्मीदवार उतार कर स्थिति स्पष्ट कर दी। मांडर चुनाव में सफलता बंधु तिर्की की निजी सफलता है जबकि रामगढ़ उप चुनाव का हाल सभी के सामने है। अब मंत्रियों के कार्यशैली पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाना दरअसल में प्रदेश अध्यक्ष व प्रभारी की एक सोची-समझी रणनीति है।