Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों को कैसे करें प्रसन्न? राशि अनुसार दान से चमक जाएगी ... झांसी में खौफनाक वारदात: होटल मैनेजर को बेल्टों से 40 बार बेरहमी से पीटा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान! 'कुर्सी के लायक नहीं राहुल गांधी...' नवजोत कौर सिद्धू का कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला, लगाए गंभीर आ... Surya Grahan 2026: साल का पहला सूर्य ग्रहण, इन 4 राशियों के लिए होगा बेहद भारी, जानें शुभ-अशुभ फल Indore Murder Case: इंदौर में प्रेमिका की हत्या कर लाश के साथ दरिंदगी, तंत्र क्रिया कर मांगी माफी Muslim Personal Law: शरिया कानून के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नो... Bihar Mukhyamantri Mahila Rozgar Yojana: अब किश्तों में मिलेंगे 2 लाख रुपये, जानें क्या हैं नई शर्ते... Gurugram News: गुरुग्राम जा रही बैंककर्मी महिला की संदिग्ध मौत, 5 महीने पहले हुई थी शादी; पति ने पुल... Bajrang Punia News: बजरंग पूनिया ने हरियाणा सरकार को घेरा, बोले- घोषणा के बाद भी नहीं बना स्टेडियम Sohna-Tawru Rally: विकसित सोहना-तावडू महारैली में धर्मेंद्र तंवर ने किया मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत

अजय नदी के अंदर से निकली प्राचीन और दुर्लभ विष्णु प्रतिमा

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पूर्वी वर्धवान जिला के केतुग्राम में अजय नदी के अंदर से प्राचीन पाल-सेना युग की विष्णु मूर्ति पायी गयी है। प्रशासनिक स्तर पर इसे अब कलकत्ता भेजने का विचार किया जा रहा है।

दूसरी तरफ स्थानीय लोग इस मूर्ति को अपने इलाके में रखने तथा विधिवत उसकी स्थापना कर पूजा प्रारंभ करने की मांग पर अड़ गये हैं।

वैसे जो मूर्ति मिली है, उसके बारे में इतिहासकारों ने कहा है कि यह अपने आप में एक दुर्लभ किस्म की मूर्ति है। शायद इस विष्णु की मूर्ति का निर्माण पाल-सेना काल में हुआ था।

उस समय इस प्रकार के विष्णुमूर्ति को त्रिविक्रम विष्णुमूर्ति कहा जाता था। इसी वजह से इसे दुर्लभ माना गया है। अजय नदी से मिली मूर्ति की सूचना पर स्थानीय पुलिस सक्रिय हुई है। केतुग्राम थाने की पुलिस ने पूर्वी बर्धमान के केतुग्राम के नरेंगा गांव के समीप अजय नदी के तट से यह प्रतिमा पायी गयी है।

इसे अब पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। शीतकाल समाप्त होने के बाद अजय नदी का जलस्तर सामान्यतः कम हो जाता है। इस दौरान अजय नदी के तट पर अनेक इलाके फिर से खुल जाते हैं ।

इन्हें स्थानीय बोली में चर कहा जाता है। इस में से एक चर से यह मूर्ति मिली है। वैसे नदी का जलस्तर कम होने के बाद विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियों की बरामदगी कोई नई बात नहीं है।

इस मूर्ति के पाये जाने के बारे में पता चला है कि गत सोमवार नरेगा क्षेत्र के कुछ लोग अजय नदी के इसी चर के आसपास घूम रहे थे। उस समय उन्होंने रेत में दबी हुई विष्णु मूर्ति को देखा।

अजय की कोख से मिले और शंख, चक्र, गदा लिए खड़ी 3 फीट ऊंचे काले पत्थर की नक्काशीदार विष्णु मूर्ति को गांव में लाया गया और पूजा शुरू हुई। मूर्ति मिलने की सूचना पर आस पास के काफी संख्या में लोग जुट गए। खबर मिलते ही केतुग्राम थाने की पुलिस भी आ गई।

ग्रामीणों से बातचीत के बाद मूर्ति को बरामद कर थाने ले जाया गया। केतुग्राम के आईसी सुमन चट्टोपाध्याय ने कहा कि सरकारी नियमों के मुताबिक इस मूर्ति को कोलकाता संग्रहालय भेजने की प्रक्रिया चल रही है। स्थानीय निवासी इस मूर्ति को यही मंदिर बनाकर स्थापित करने की मांग कर रहे हैं।

केतुग्राम में मिली विष्णु मूर्ति लगभग 1,000 वर्ष पुरानी प्रतीत होती है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, मंगलकोट पूर्वी बर्दवान के प्राचीन शहरों में से एक है।

इस क्षेत्र में राजा विक्रमादित्य के समय के प्राचीन निशान अभी भी देखे जा सकते हैं। मंगलकोट में अजय चार से आज भी कई प्राचीन देवी-देवताओं की मूर्तियां बरामद हुई हैं। निवासियों का अनुमान है कि यह त्रिविक्रम विष्णु मूर्ति मंगलकोट से केतुग्राम के नरेंगा गांव में पानी में तैरकर आई थी।