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भारत-नेपाल सीमा पर लश्कर समर्थित गेस्ट हाउस

  • खुफिया एजेंसियों ने सरकार को आगाह किया

  • दो मंजिला गेस्ट हाउस किनलोगों का अड्डा

  • बिहार और यूपी की सीमा में प्रवेश आसान

अवधेश कुमार शर्मा

पटनाः भारत-नेपाल खुली सीमा पर बिहार से लेकर पश्चिमोत्तर क्षेत्र में बड़ी संख्या में मस्ज़िद, गेस्ट हाउस, मदरसा और अन्य इस्लामिक प्रचार केंद्र कार्यरत हैं। इस सम्बंध में बताया गया है कि पाकिस्तान आर्थिक संकट में है, अलबत्ता पाकिस्तान के दावत ए इस्लामिया नामक संगठन से आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट में भारत-

नेपाल खुली सीमा पर कट्टरपंथी गतिविधियों का मामला उज़ागर हुआ है। सूत्रों की माने तो भारत नेपाल सीमावर्ती जिला में पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में पाकिस्तान समर्थित मॉड्यूल उन आतंकवादियों का पनाहगाह बना हुआ है, जो भारत को निशाना बनाना चाहते हैं।

खुफिया एजेंसियों के प्रतिवेदन के दृष्टिगत, भारत-नेपाल सीमा पर दो मंजिला गेस्टहाउस बनाये गये है, जहां दावत-ए-इस्लामिया (डीईएल) के मेहमान ठहरते रहते हैं। वहां पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों के लोगों को रखा जाता है।

खुफिया विभाग की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि डेल (दावत ए इस्लाम) ने उपर्युक्त निर्माण में 1 करोड़ 25 लाख रुपए ख़र्च होने की बात बताया है। उपर्युक्त धनराशि उन्हें पाकिस्तान में कार्यरत डीईएल की शाखाओं से प्राप्त है। जिहादी समूह में अधिकत्तर पाकिस्तान स्थित समूहों से धन राशि संग्रह करने में लगे रहते हैं।

एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के सीमावर्ती जिलों रौतहट, परसा, कपिलवस्तु, सुनसरी, बारा, नवलपरासी, रुपनदेही और अन्य जिलों में विदेशी सहायता प्राप्त करने वाली मस्जिदें और मदरसा भारत विरोधी गतिविधियों का केंद्र बना हुआ हैं।

लश्कर-ए-तैयबा जैसे शीर्ष आतंकवादी संगठन उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, फैजाबाद, उधर पीलीभीत तक ठिकाना बनाने का प्रयास कर रहे हैं और नेपाल की सीमा से लगे भारतीय क्षेत्र को निशाना बनाने को प्रयासरत हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में मदरसा, मस्जिद का निर्माण से नो मेन्स लैंड भी अछूता नहीं रहा है।

जिससे भारत को विशेष चिंता है और नेपाल को चिंता करने की आवश्यकता है। भारत के सीमावर्ती नेपाल के जिलों में संचालित पाकिस्तान समर्थित मॉड्यूल भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल आतंकवादियों को संरक्षण देते हैं। भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती इस्लामिक संस्थाओं में संचालित गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

लश्कर ए तैयबा (ऑपरेटिव) संचालक मोहम्मद उमर को इस क्षेत्र में नेटवर्क के विस्तार का काम सौंपा गया है। उमर को इसी तरह की गतिविधियों के लिए पहले भी कई बार पश्चिम बंगाल के कोलकाता और बिहार के दरभंगा भेजा गया।

खुफिया एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ पदधिकारी के अनुसार, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में कट्टरवादी, चरमपंथी समूहों के माध्यम सीमावर्ती क्षेत्र के मदरसों और मस्जिदों में राशि का पहुँचना, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।