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बीएड की छात्राओँ ने शिक्षा अधीक्षक के पास शिकायत दर्ज किया

रांचीः बीएड की छात्राओं को पढ़ाई के दौरान 5 महीने सरकारी विद्यालयों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है। इस दौरान बीएड कर रही बच्चियां प्रैक्टिस टीचिंग क्लासेस लेती है और सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों को शिक्षित करती हैं।

राजकीय महिला शिक्षण प्रशिक्षण बीएड महाविद्यालय बरियातू सहित कई संस्थानों की छात्राओं ने कहा कि पिछले 3 महीने से रांची के विभिन्न स्कूलों में जिला शिक्षा अधीक्षक के निर्देश पर हम प्रैक्टिस स्टिचिंग क्लासेस प्रशिक्षण के दौरान कर रहे हैं,

समय पर स्कूल जाना,नियमित कक्षाएं लेना,सिलेबस पूरा करना, बच्चों को पढ़ाई के प्रति आकर्षण पैदा करना जैसे कार्य पिछले तीन महीने से बखूबी किए जा रहे हैं।

2021-23 सत्र के बच्चियों का सेशन अब समाप्त होने वाला है ऐसे में अचानक से शिक्षा विभाग के सचिव के निर्देशानुसार छात्रों का ट्रेनिंग कैंसिल कर फिर से 5 महीने की ट्रेनिंग का निर्णय ग़लत है, अविवेकपूर्ण है।

सरकार के इस निर्णय के खिलाफ राजकीय महिला शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय बरियातू की लगभग 50 से अधिक छात्राओं ने राष्ट्रपति पुरस्कृत महाविद्यालय का छात्रा फलक फातिमा के नेतृत्व में अपना विरोध जिला शिक्षा अधीक्षक रांची के समक्ष दर्ज किया है।

बरियातू बीएड की छात्राओं ने जिला शिक्षा अधीक्षक के समक्ष लिखित ज्ञापन भी सौंपा है। ज्ञापन सौंपने वालों में राष्ट्रपति पुरस्कृत महाविद्यालय की छात्रा फलक फातिमा,पूर्णिमा कुमारी, ज्योति कुमारी, पल्लवी साधु, लवली कुमारी, जयंती कुमारी, डॉली कुमारी,अंकिता आरती, अनामिका,अनाहिता कुमारी, सोनम सुरभि, दिव्या तिग्गा, रेनू तिर्की, राजमणि लकड़ा, महिमा दास, मनीषा कुमारी, शैली कुमारी, याचिका कुमारी, अनम फारूकी, सुषमा कुमारी, देवी कुमारी, जयंती रागनी बाखला मुख्य रूप से उपस्थित थीं।

छात्राओं का कहना है कि हमने अपना ट्रेनिंग लगभग पूरा कर लिया है,छात्राऐं हॉस्टल में, किराए पर घर लेकर ट्रेनिंग कर रही हैं और अपनी पढ़ाई कर रही हैं, ऐसे में सरकार द्वारा बच्चियों को गांव में जाकर ट्रेनिंग करने का फरमान अमानवीय होगा।

आर्थिक समस्याएं, सुरक्षात्मक समस्याएं तथा समय की कमी का भरपूर नुकसान छात्राओं को उठाना पड़ेगा। जिला शिक्षा अधीक्षक ने बताया कि किसी स्कूल में जाने के दौरान शिक्षा विभाग के सचिव के सामने स्कूल के शिक्षक की देरी से आने के कारण उन्होंने ऐसा फरमान जारी कर दिया है।

सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई की स्थिति किसी से छुपी हुई नहीं है। जिला शिक्षा अधीक्षक ने मिलने गए बच्चियों से कहा उन्हें सचिव या फिर झारखंड काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग के पास जाना होगा या फिर शिक्षा सचिव से बात करनी होगी।

मौके पर उपस्थित पासवा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक दूबे ने कहा महिलाओं की समस्याओं को देखते हुए एवं ट्रेनिंग एवं कोर्स की अवधि लगभग समाप्ति की ओर है इसे देखते हुए शिक्षा विभाग को निर्णय करना चाहिए।इसे लेकर हम सरकार के शिक्षा सचिव के पास या फिर झारखंड काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग के पास निवेदन करेंगे और अगर बात नहीं सुनी गई तो शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो से भी मिलेंगे।