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करीब दो सौ वर्षों बाद यहां लौट आये हैं जंगली जानवर

  • प्राकृतिक न्याय की कारण अब फिर से वन्य प्राणी लौटे

  • इंसानों ने यहां कब्जा कर मवेशिया पालना शुरु किया था

  • 27 हजार हेक्टेयर में 25 साल की मेहनर अब सफल

केप टाउनः मात्र दो लोगों के और 25 साल के अथक प्रयास का परिणाम अब दिखने लगा है। इंसानों ने अपनी जरूरत के लिए जिस इलाके से जंगली जानवरों भगा दिया था, वहां का माहौल अनुकूल होते ही वे जानवर फिर से लौट आये हैं। यह इलाका ग्रेट कारू का है। कभी यह शेर और चीतों का इलाका था।

इस इलाके में इंसानों की आबादी आने के बाद वह लोगों ने मवेशी पालना प्रारंभ किया था। वहां लगातार जंगली जानवरों से इंसानों का टकराव होने का नतीजा था कि वर्ष 1840 में इस इलाके से अफ्रीका के शेर गायब हो गये। अगले तीस वर्षों में चीतों ने भी इंसानी हमलों की वजह से मैदान छोड़ दिया था।

वर्ष 1997 तक यही स्थिति कायम रही। उसके बाद एक निजी फर्म के स्तर पर इसे फिर से प्रकृति को लौटाने का प्रयास प्रारंभ हुआ तो अब उसका नतीजा सामने है। सामरा प्राइवेट गेम रिजर्व नामक कंपनी का यह इलाका मवेशियों का फार्म हुआ करता था।

सामरा कंपनी ने वहां के 11 ऐसे फॉर्मो से जमीन खरीद ली। यह करीब 27 हजार हेक्टेयर जमीन थी। इसे मार्क और सारा टॉंपकिन ने प्रारंभ किया था। जब इनलोगों ने जमीन को खरीदा तो यह जंगल नहीं रह गया था। वहां से पहले मवेशियों को हटाया गया और उसके बाद फॉर्म की सुरक्षा के लिए जो कांटेदार बाड़े लगाये गये थे, उन्हें भी हटा लिया गया।

नौ किस्म के वनस्पतियों की प्रजाति वहां मौजूद थी। मवेशियों को हटाये जाने के बाद प्रकृति ने फिर से इसे पूर्व स्थिति में लाने का काम किया। इसकी वजह से वहां फिर से जंगल पनप गये। नतीजा हुआ कि नदी और झरने भी ठीक हो गये। धीरे धीरे वहां सबसे पहले हिरणों की एक प्रजाति घास चरने आने लगी।

बीच बीच में जंगली हाथियों का झूंड भी वहां से गुजरने लगा। उसके बाद फॉर्म की तरफ से एक मादा चीता सिबेला को यहां लाया गया। इस मादा चीता को इंसानों और शिकारी कुत्तों ने बुरी तरह जख्मी कर दिया था। उसका ऑपरेशन किया गया और काफी दिनों तक उसकी देखभाल की गयी।

पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे इस जंगल में छोड़ दिया गया। अब सिबेला के 20 शावकों की वजह से वहां चीतों की आबादी बढ़ने लगी है।

उनके बाद फॉर्म की तरफ से शेरों का एक जोड़ा वहां लाया गया। टिटूस और सिकेलेले की जोड़ी को वहां जनवरी 2019 में छोड़ा गया था। अब दो साल के बाद उनके दो बच्चे भी हो चुके हैं। अब शेरों की शिकार की वजह से मुर्दा खाने वाले अन्य जंगली जानवर भी वहां आ चुके हैं। इस बीच वहां जंगल भी अपनी पूर्व स्थिति में लौटने लगा है।