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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का अर्थ क्या समझा जाए

सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर केंद्र सरकार से पूछा कि अगर हर फैसला केंद्र और उपराज्यपाल की ओर से ही लिया जाएगा तो दिल्ली में एक चुनी हुई सरकार का औचित्य क्या है। दरअसल इस एक कथन से साफ हो गया है कि न्यायपालिका भी दिल्ली में चल रही घटनाओँ को किस नजरिए से देखती है।

इसमें भाजपा और उनके अधीनस्थ लोगों को सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वे आम आदमी पार्टी के खिलाफ कोई ऐसा सबूत नहीं दे पा रहे हैं जो शिक्षा और स्वास्थ्य की लंबी लकीर को मिटा सके। अब तक सैकड़ों फाइलों पर जांच हुई और नतीजा कुछ नहीं निकला।

अब मेयर चुनाव के मौके पर भी जोरआजमाइश में यह साफ हो गया है कि दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना दरअसल भाजपा के इशारे पर ही काम कर रहे हैं। लिहाजा गड़े मुर्दे उखाड़ने फिर से केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का दरवाजा खटखटाया था।

सिसोदिया ने अपने ट्वीट में लिखा- सीबीआई उनके घर पर पहले भी छापा मार चुकी है। उनके गांव भी पहुंच चुकी है। सीबीआई को उनके खिलाफ ना कुछ मिला है, ना कुछ मिलेगा। मनीष सिसोदिया ने कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है। उन्होंने ईमानदारी से बच्चों की शिक्षा के लिए काम किया है।

याद दिला दें कि दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कथित आबकारी घोटाले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। एजेंसी ने सिसोदिया समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने इस केस में सिसोदिया से कई घंटे पूछताछ की थी और उनके आधिकारिक आवास पर छापे मारे थे।

दिल्ली की शराब नीति में गड़बड़ी के मामले में जांच में जुटी सीबीआई ने चार महीने पहले डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के लॉकर की तलाशी पूरी की। गाजियाबाद के वसुंधरा सेक्टर 4 की पंजाब नेशनल बैंक में मनीष सिसोदिया का बैंक लॉकर है। सीबीआई की टीम ने बैंक में 45 मिनट तक लॉकर की जांच की।

इस दौरान मनीष सिसोदिया और उनकी पत्नी भी बैंक में मौजूद रहीं। मनीष ने कहा, जन्माष्टमी के दिन सीबीआई ने मेरे घर पर रेड डाली थी। उस वक्त वो मेरी पत्नी के लॉकर की चाबी लेकर गई थी। आज सीबीआई की टीम इसी लॉकर को खोलने के लिए बैंक में आई थी। उन्होंने हमें भी बुलाया था।

लॉकर से मुश्किल से 70–80 हजार रूपए कीमत के बच्चों के पत्नी के जेवरात मिले हैं। जांच सबूत है कि मैं और मेरा परिवार पाक-साफ निकले हैं। प्रधानमंत्री की सारी जांच में मुझे क्लीन चिट है। दिल्ली की नई आबकारी नीति में गड़बड़ी का आरोप है।

यह भी आरोप है कि इस नीति के जरिए शराब लाइसेंस धारियों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाया गया है। लाइसेंस देने में अनदेखी हुई है। टेंडर के बाद शराब ठेकेदारों के 144 करोड़ रुपए माफ करने का आरोप है। दूसरी तरफ दिल्ली की नई आबकारी नीति को पंजाब में लागू कर वहां की सरकार ने अतिरिक्त राजस्व कमाना चालू रखा है।

इसलिए कौन सही है और कौन गलत, इसे समझना आसान है। वैसे इस बार की सीबीआई छापा के बारे में सीबीआई ने कहा कि उनकी टीम छापा मारने मनीष सिसोदिया के यहां नहीं गयी थी सिर्फ कुछ कागजात लाने एजेंसी के अधिकारी वहां गये थे।

लेकिन इतने दिनों बाद भी अगर दस्तावेज की जरूरत पड़ रही है तो यह स्पष्ट है कि अब तक जब्त किये गये दस्तावेजों से सीबीआई को कुछ नहीं मिला है। अगर कुछ मिला होता तो चार्जशीट में मनीष सिसोदिया का नाम भी होता। भाजपा दूसरी राजनीतिक पार्टियों को भी सरकारी एजेंसियों के इस किस्म के दुरुपयोग की सीख दे रही है।

भविष्य में कभी राजनीतिक सत्ता पलटी तो भाजपा को भी इसी दौर से गुजरना होगा और उस वक्त की स्थिति क्या होगी, उसका अंदाजा लगाना सहज है।

भाजपा में शामिल होने वाले अनेक नेताओं के खिलाफ पहले से ही जांच चल रही थी। अभी यह सारी जांच ठहरी हुई है लेकिन इन जांचों में प्रथमदृष्टया तो तथ्य सामने आ चुके हैं, उन्हें अब झूठलाया भी नहीं जा सकता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या वाकई लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्य सरकारों के चुनाव और अधिकारों के जो प्रावधान भारतीय संविधान में किये गये हैं, उनका वर्तमान केंद्र सरकार पालन कर पा रही है।

दरअसल भाजपा भी वही गलती दोहरा रही है जो कांग्रेस ने पहले किया था। आम आदमी पार्टी नहीं बल्कि अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलन को कुचलने की साजिशों का क्या नतीजा हुआ, यह सबके सामने है।

दूसरी तरफ भाजपा की सरकार ने दिल्ली में जो किया, उसका नतीजा पंजाब में दिख रहा है और गुजरात की बदौलत आम आदमी पार्टी अब राष्ट्रीय पार्टी बन चुकी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लोकतंत्र की कसौटी पर देखने से यह स्पष्ट होता है कि शीर्ष अदालत पूरे देश को क्या संदेश दे रही है।