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शराब सिंडिकेट के बहाने दूसरा निशाना साधेगी ईडी

राष्ट्रीय खबर

रांची: ईडी की तरफ से जल्द ही छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की जायेगी। ईडी की तरफ से छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग के कई ठिकानों पर छापेमारी की गयी है। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) से जुड़े आइआरएस सेवा के अधिकारी एपी त्रिपाठी की नियुक्ति और अन्य मामलों पर ईडी जांच में जुड़ी है।

छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) को ही झारखंड में नयी उत्पाद नीति लागू करने के लिए सलाहकार नियुक्त किया गया था। जिसके आधार पर राज्य में नयी उत्पाद नीति भी बनी। इसके बाद छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट से जुड़े कई लोग और कंपनियां भी झारखंड आ गयीं। इसमें सिद्धार्थ सिंघानियां के सुमित फैसिलिटिज प्राइवेट लिमिटेड का भी नाम शामिल है। सुमित फैसिलिटिज फिलहाल राज्य के 10 जोन में से चार से अधिक जोन में खुदरा शराब की दुकानों पर प्लेसमेंट एजेंसी के रूप में काम कर रही है। इसको लेकर ही ईडी ने झारखंड में भी अपनी कार्रवाई करने की रूपरेखा तैयार कर ली है।

नयी उत्पाद नीति लागू होने के बाद सुमीत फैसिलिटीज, ए2जेड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, प्राइम वन और इगल हंटर नामक प्लेसमेंट एजेंसी का चयन किया गया। इन एजेंसियों के द्वारा ही राज्य में 1580 से अधिक खुदरा शराब दुकानों के जरिये विदेशी ब्रांड के शराब उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इन कंपनियों को ही राजस्व वसूली का जिम्मा दिया गया है।

2022-23 के लिए 25 सौ करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के बाबत 15 दिसंबर 2022 तक 1300 करोड़ रुपये से अधिक की राजस्व वसूली की गयी थी, जो लक्ष्य से काफी कम था। सरकार की एजेंसी झारखंड स्टेट बीभरेज कारपोरेशन लिमिटेड की तरफ से लक्ष्य से पीछे रहने के लिए चारों प्लेसमेंट एजेंसियों की बैंक गारंटी जब्त कर ली गयी थी।

इन प्लेसमेंट एजेंसियों को नौ फीसदी की हिस्सेदारी के आधार पर राजस्व वसूली का जिम्मा दिया गया था। इतना ही नहीं तीन थोक वक्रेता कंपनियों के पैसे भी सरकार की ओर से जब्त किये गये, जो राज्य में शराब के प्रीमियम ब्रांड उपलब्ध कराने में असमर्थ रहे थे।

जानकारी के अनुसार झारखंड में शराब सिंडिकेट को अफसरों का खुला समर्थन मिला। इसके अलावा रांची में दूसरे राज्यों से लाकर राजधानी के कई बार में महंगी शराब बेचने के आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था। पर अधिकारियों की तरफ से जब्त की गयी महंगी शराब का ब्योरा अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

इसलिए ईडी अब इसी सिंडिकेट के बहाने दूसरों पर निशाना साधना चाहती है, जिनमें हेमंत सोरेन के करीबी अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। दूसरी तरफ दिल्ली आबकारी घोटाले की जांच की आंच भी छत्तीसगढ़ तक पहुंचने के बाद शराब सिंडिकेट के राजनीतिक प्रभाव की बात भी सामने आ चुकी है।