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राष्ट्रीय पार्टी बनकर राष्ट्रीय चुनौती बनेगी आप

आम आदमी पार्टी अब वोट प्रतिशत के आधार पर एक राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर चुकी है। अब सिर्फ चुनाव आयोग की औपचारिक एलान होना बाकी है। यह उपलब्धि गुजरात के विधानसभा चुनावों की वजह से मिली है, जहां पार्टी को 13 प्रतिशत वोट मिले हैं। यह अलग बात है कि वहां जीतने वाले इस पार्टी के पांच विधायकों का राजनीतिक भविष्य क्या होगा, इस पर कयास लगाये जा रहे हैं।

दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी का मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खटक रहा है और उन्होंने मुफ्त की रेवड़ी का उल्लेख कर सीधा सीधा इस पार्टी की नीतियों के खिलाफ हमला बोला है। गुजरात में मोदी मैजिक के अपने चरम पर पहुंच जाने के पीछे का सियासी गणित क्या है, दूसरा, हिमाचल में भाजपा और मोदी की तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी की हार और कांग्रेस की वापसी के मायने क्या हैं और तीसरा, आम आदमी पार्टी ने दिल्ली एमसीडी में बड़ी जीत दर्ज कर, गुजरात में पांच विधायकों से खाता खोलकर और अपना वोट शेयर वहां करीब 13 फीसदी पहुंचाकर क्या यह संकेत दिया है कि कांग्रेस के लिए अब आप ज्यादा बड़ा खतरा बन गई है।

चुनाव परिणामों की बात करें तो गुजरात में आम आदमी पार्टी के मैदान में होने से सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस को हुआ है जहां उसके विधायकों की संख्या 77 से घटकर 17 रह गयी। इसलिए यह बहस होने लगी है कि क्या भाजपा के साथ लड़ाई का एलान करने के बाद भी यह सबसे नई पार्टी दरअसल कांग्रेस के लिए बड़ी मुसीबत बन गयी है क्योंकि इस पार्टी ने तो दिल्ली में कांग्रेस को लगभग साफ ही कर दिया है।

2024 जीतने के लिए राहुल गांधी जिस तरह जमीनी स्तर पर ‘भारत जोड़ो’ यात्रा के जरिये लोगों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं या फिर कांग्रेस परिवारवाद के आरोपों से बचने के लिए जिस तरह मल्लिकार्जुन खडगे को पार्टी मुखिया बना चुकी है, उसकी काट तैयार करने के लिए आप बड़ी उपयोगी साबित हो रही है। भाजपा की जानती है कि विपक्षी वोट के बंटने से ही उसकी स्थिति और मजबूत होगी।

उत्तर प्रदेश में सपा और बिहार में राजद ने जो विस्तार किया है, उसका आधार अलग है। यह और बात है कि कांग्रेस वहां भी हाशिये पर है। आप में भिन्न संभावनाएं दिखाई देती हैं।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुछ बयानों पर गौर कीजिए। चुनाव से पहले और अब नतीजों के बाद भी प्रधानमंत्री लगातार अपने भाषणों में कांग्रेस से ज्यादा आप पर हमले करते नजर आए हैं। शॉर्टकट की सियासत करने के नाम पर रेवड़ियों जैसी घोषणाएं करने को लेकर लगातार आम आदमी पार्टी पर ही हमले करते नजर आ रहे हैं।

केजरीवाल तब से ही गुजरात में चुनाव लड़ने की बात बढ़-चढ़ कर करने लगे थे और उनके गुजरात दौरे तेज हो गए थे। यह कोशिश हिमाचल के लिए भी हुई, आप ने यहां भी 67 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, पर वहां की जनता ने उन्हें नकार दिया। अब दिल्ली में एमसीडी की जीत से आप को खुला मैदान मिल गया है। उसने उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने का एलान भी कर दिया है और यूपी से उसके टिकट के दावेदारों की संख्या भी बढ़ने लगी है।

हिमाचल में सरकार बनाने में कामयाब कांग्रेस चाहकर भी फिलहाल ज्यादा कुछ नहीं कर पाएगी, क्योंकि आप के नतीजे ने उसके हौसले पस्त कर दिए हैं।यही कांग्रेस की चुनौती भी है, क्योंकि भाजपा का हित इसमें है कि आप नंबर दो पर बन आये। आम आदमी पार्टी 2023 के चुनाव में मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है। गुजरात की तरह परिणाम आये तो मध्यप्रदेश में भी आप दरअसल कांग्रेस को 51 सीटों पर नुकसान पहुंचाएगी। इसका सीधा फायदा भाजपा को होगा।

कांग्रेस और आप का वोट बैंक लगभग एक जैसा है, इसलिए आप कांग्रेस के वोटबैंक में ही सेंधमारी करेगी। गुजरात के निकाय चुनाव में मिली सफलता के बाद आप को लोगों ने सीरियस लेना शुरू किया था। ऐसे ही हालात अब मप्र में भी बन रहे हैं। शहरी आबादी के एक वर्ग का झुकाव भी आप की तरफ हुआ है। आप का भी ज्यादा फोकस शहरी क्षेत्रों के वोटर्स को फ्री बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य वाली सुविधाओं का दिल्ली मॉडल दिखाकर लुभाना रहा है। अपने दिल्ली मॉडल से आप को पंजाब में सत्ता मिली है।

गुजरात में भी लोगों ने 13% वोट देकर नेशनल पार्टी बना दिया है। इसका मतलब है कि यह फॉर्मूला काम कर रहा है। इसलिए देश की राजनीति के चाल और चरित्र से उब चुकी आम जनता के लिए आप एक तीसरा विकल्प है। अब राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर वह खुद को राजनीतिक संक्रमण से कितना बचा पाती है, यह देखना शेष है। पर यह तय हो गया है कि भाजपा की तमाम कोशिशों के बाद भी उसका ग्राफ ऊपर जा रहा है।