कांग्रेस से दूरी बनाकर चलने का एलान दोहराने के बाद फैसला
ईवीएम पर से भरोसा उठ गया है
एसआईआर नाम काटने के लिए नहीं
ज्ञानेश कुमार को हटाया जाना चाहिए
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः द्रमुक (डीएमके) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में हुई पार्टी सांसदों की बैठक में पारित एक प्रस्ताव में मांग की गई, उन्हें (मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार) पद से हटाया जाना चाहिए और उनके खिलाफ उचित जांच कराई जानी चाहिए।द्रमुक ने मतपत्रों की ओर लौटने की भी वकालत की। पार्टी का तर्क है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में दर्ज वोटों और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल की पर्चियों के बीच कथित विसंगतियों के कारण ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं।
पार्टी ने कहा, इसीलिए डीएमके लगातार वीवीपैट पर्चियों की गिनती की मांग कर रही है। चुनावों में जनता का विश्वास केवल बैलेट पेपर प्रणाली पर वापस लौटकर ही बहाल किया जा सकता है।
बैठक में भारत निर्वाचन आयोग के कामकाज पर भी चिंता व्यक्त की गई। पार्टी ने कहा कि आयोग के निष्पक्ष रूप से कार्य करने में विफल रहने के कारण चुनावों पर से जनता का भरोसा उठ रहा है।
द्रमुक ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण को पूरी तरह से रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। पार्टी ने यह मांग भी रखी कि भविष्य के चुनाव मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर ही कराए जाने चाहिए। पार्टी ने कहा, एसआईआर को मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, न कि उन्हें उनके मताधिकार से वंचित करना चाहिए। नामों को जोड़ने और हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
द्रमुक ने एक छात्र संगठन और कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया। पार्टी का दावा है कि इन प्रदर्शनों का प्रभाव कांग्रेस द्वारा आयोजित प्रदर्शनों की तुलना में अधिक पड़ा है।
द्रमुक ने आरोप लगाया, कांग्रेस इन विरोध प्रदर्शनों के प्रभाव से घबरा गई है। यद्यपि वह शुरुआत में केवल दर्शक बनी रही, लेकिन जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज हुए, उस पर शामिल होने का दबाव बना। जो लोग कांग्रेस के इतिहास से परिचित हैं, वे जानते हैं कि यह पार्टी दूसरों के कंधे पर सवार होने के बाद उनकी पीठ में छुरा घोंपती है। वह तमिलनाडु और केरल में एसआईआर पर चर्चा के लिए तैयार नहीं है।