एर्देगॉन सरकार के दमन का रवैया अब मीडिया पर भी जारी
अंकाराः तुर्किए की पुलिस ने बुधवार तड़के तुर्किए के सबसे अधिक देखे जाने वाले और विपक्ष समर्थक प्रमुख समाचार चैनल हल्क टीवी के दफ्तरों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान चैनल का सीधा प्रसारण रोक दिया गया और एक सरकारी प्रशासक (ट्रस्टी) को इसके संचालन का प्रभार सौंप दिया गया। विपक्ष समर्थक मीडिया संस्थानों के खिलाफ सरकार के ताजा कदम के रूप में इस कार्रवाई को देखा जा रहा है।
छापेमारी के दौरान सैकड़ों पुलिसकर्मी तुर्किए की राजधानी और मुख्यालय स्थित इमारतों में दाखिल हुए और किसी को भी भीतर जाने से रोक दिया गया। इसके साथ ही लाइव समाचार प्रसारण को रोककर वहां पुराने वृत्तचित्र और लोक नृत्य जैसे कार्यक्रम प्रसारित किए जाने लगे। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है। कई मानवाधिकार संगठनों ने भी तुर्किए सरकार के इस कदम पर अपनी गहरी चिंता जताई है।
तुर्किए पुलिस ने बुधवार तड़के देश के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले और विपक्ष समर्थक समाचार चैनल हल्क टीवी के मुख्यालय पर छापा मारा। इस दौरान चैनल का सीधा प्रसारण रोक दिया गया और इसका नियंत्रण सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक (ट्रस्टी) को सौंप दिया गया।
इसके अलावा पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी कर 11 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक पत्रकार और हल्क टीवी के अध्यक्ष जाफर महिरोग्लू के परिवार के सात सदस्य शामिल हैं। महिरोग्लू ने इस घटना को तुर्किए के लिए एक काला दिन करार दिया है। तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन की सरकार द्वारा आलोचक मीडिया पर की गई यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। सरकारी अभियोजकों ने बताया कि यह कार्रवाई महिरोग्लू के खिलाफ रिश्वतखोरी, टेंडर में धांधली और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के तहत की गई है। हालांकि, विदेश में रह रहे महिरोग्लू ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि सरकार न्यायपालिका का इस्तेमाल राजनीतिक हथकंडे के रूप में कर रही है।
सुबह होते ही कई पत्रकार और कर्मचारी दफ्तर के बाहर भारी बारिश में एकत्र हो गए, जहाँ दंगारोधी पुलिस तैनात थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी पर एक घातक हमला बताया है। अंकारा में विपक्षी सांसदों ने अपनी आंखों पर काली पट्टी और मुंह पर काला टेप बांधकर संसद में मौन विरोध प्रदर्शन किया, वहीं विभिन्न पत्रकार संगठनों ने सड़कों पर उतरकर स्वतंत्र मीडिया को दबाया नहीं जा सकता के नारे लगाए।