सीजेपी के खिलाफ दिल्ली पुलिस का अत्यंत सख्त रवैया
प्लेन से तीनों नेता गिरफ्तार
आने वालों को ट्रेन में रोका
पूरा इलाका छावनी में तैनात
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित विशाल प्रदर्शन से ठीक पहले राजधानी में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। प्राधिकारियों ने देश की नवगठित ‘कॉकरोच’ पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को नई दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरते ही हिरासत में ले लिया।
दीपके का यह आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में उभरा है। दीपके ने विवादास्पद मतदाता सत्यापन अभियान के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि, प्रशासन ने पहले ही साफ कर दिया था कि इस प्रदर्शन की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई है। दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए किसी अनुमति की जरूरत ही नहीं है।
आंदोलनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए 2 करोड़ से अधिक आबादी वाली राजधानी में कड़े सुरक्षा प्रतिबंध लागू कर दिए गए। 20,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई, सैकड़ों विरोधियों को हिरासत में लिया गया, प्रमुख मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए, मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं और सड़कों पर बैरिकेड्स लगा दिए गए। लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार गिरफ्तारी की चेतावनियां जारी की गईं।
कड़े सुरक्षा घेरे के बीच एक 33 वर्षीय महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन करने की जगह है। अगर लोगों को यहां आने की इजाजत नहीं दी जा रही है, तो इसका मतलब है कि सत्ता में बैठा कोई व्यक्ति वास्तव में डरा हुआ है और हमारे लोकतंत्र में कुछ गड़बड़ है।
इस विवाद की मुख्य वजह देश की मतदाता सूची से अनुमानित 13 करोड़ नाम (लगभग 13 प्रतिशत) का हटाया जाना है। विपक्ष और युवा संगठनों का आरोप है कि इन नामों को हटाए जाने से उन हालिया राज्य चुनावों के परिणामों पर सीधा असर पड़ा, जिनमें भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण राजनीतिक रूप से प्रेरित था। वर्ष 2029 में सेवानिवृत्त होने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आयोग की निष्पक्षता का बचाव करते हुए कहा कि हटाए गए नाम दोहरे, मृत व्यक्तियों के या स्थानांतरित हो चुके लोगों के थे। यह विवाद आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले गहरा गया है।
अपनी गिरफ्तारी के दौरान दीपके ने देश की मौजूदा स्थिति की तुलना आपातकाल से करते हुए कहा, आप देख सकते हैं कि देश किस दिशा में जा रहा है। वे हमें सीधे फ्लाइट से गिरफ्तार करने आए हैं। ऐसा तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी नहीं किया था, जिनके दौरान नागरिक स्वतंत्रताएं निलंबित कर दी गई थीं।
इस घटनाक्रम पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने आरोप लगाया कि सीजेपी और विपक्षी दल देश में बेहद खतरनाक और गंभीर स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे सरकार सख्ती से निपटेगी। वहीं, इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट के प्रमुख अजय साहनी ने कहा कि बिना किसी हिंसा के इस पैमाने पर प्रतिबंध लगाना सरकार के भीतर की घबराहट को दर्शाता है।
इस पूरी कार्रवाई पर एम्नेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बोर्ड अध्यक्ष आकार पटेल ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को बिना किसी धमकी, मनमानी हिरासत या अपनी स्वतंत्रता पर प्रतिबंध के सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही मांगने का अधिकार होना चाहिए।