Breaking News in Hindi

तुर्की से पूरी तरह से सैन्य वापसी की घोषणा

कुर्दिश संगठन पीकेके ने औपचारिक तौर पर एलान कर दिया

अंकाराः  मध्य पूर्व के सबसे जटिल और लंबे समय से चले आ रहे सशस्त्र संघर्षों में से एक में एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है। प्रतिबंधित कुर्दिश वर्कर्स पार्टी (पीकेके) ने आधिकारिक रूप से तुर्की की सीमाओं से अपने सभी सशस्त्र बलों की पूर्ण और अंतिम रूप से वापसी की घोषणा कर दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही संगठन ने तुर्की सरकार से भी यह पुरजोर आह्वान किया है कि वह शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और इस दिशा में सकारात्मक व ठोस राजनीतिक कदम उठाए, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त हो सके।

यह महत्वपूर्ण घोषणा गुरुवार को पीकेके से जुड़ी एक प्रमुख समाचार एजेंसी एएनएफ द्वारा प्रकाशित एक आधिकारिक बयान के माध्यम से सार्वजनिक की गई। इस बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि क्षेत्र में लंबे समय से जारी हिंसा को समाप्त कर शांति और स्थिरता बहाल करने की दिशा में यह एक अभूतपूर्व और निर्णायक कदम है।

एएनएफ की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की सरकार के साथ दशकों तक चले खूनी संघर्ष, सैन्य टकराव और गहरे राजनीतिक तनाव के बाद पीकेके ने मई 2025 में ही अपने पूर्ण विघटन (डिसॉल्यूशन) की बड़ी घोषणा कर दी थी। उस ऐतिहासिक समय में संगठन के शीर्ष नेतृत्व द्वारा यह कड़ा और साहसिक निर्णय लिया गया था कि पीकेके की संपूर्ण संगठनात्मक संरचना को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा और दशकों से चले आ रहे सशस्त्र संघर्ष के अध्याय को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा।

ज्ञात हो कि तुर्की राज्य और इस प्रतिबंधित संगठन के बीच चले इस खूनी संघर्ष में हजारों निर्दोष लोगों की जान गई थी, और यह संघर्ष मध्य पूर्व के इतिहास के सबसे लंबे और त्रासदपूर्ण क्षेत्रीय विवादों में शुमार रहा है। सैन्य वापसी और संगठन के पूरी तरह से विघटित होने की यह घोषणा तुर्की और पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में एक नया मोड़ साबित हो सकती है, जिससे दशकों से सुलग रही हिंसा की आग पर काबू पाने में मदद मिल सकती है।

अब देश-विदेश के राजनीतिक विश्लेषकों और कूटनीतिज्ञों की निगाहें पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि तुर्की सरकार पीकेके की इस शांति पहल और एकतरफा सैन्य वापसी के जवाब में अपनी आगामी राजनीतिक और रणनीतिक नीति क्या तय करती है। क्या सरकार इस अवसर का लाभ उठाकर एक समावेशी राजनीतिक समाधान की ओर बढ़ेगी, यह आने वाला समय ही बताएगा।