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फ्रांसीसी राजनीति में दक्षिणपंथी दल का दबदबा

मरीन ले पेन की पार्टी ने पहली बार बनाया संसदीय दल

पेरिसः फ्रांस की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला है। लगभग अंतिम चुनावी परिणामों के आधार पर आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मरीन ले पेन के नेतृत्व वाले सुदूर-दक्षिणपंथी दल नेशनल रैली ने रविवार को हुए फ्रांसीसी सीनेट चुनावों में शानदार सफलता हासिल की है। इस बड़ी जीत के साथ ही इस पार्टी ने फ्रांसीसी संसद के उच्च सदन (सीनेट) में पहली बार अपना एक आधिकारिक संसदीय समूह बनाने में कामयाबी हासिल कर ली है, जिसे देश के राजनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

पूर्ण परिणाम सामने आने से पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक उत्साहपूर्ण पोस्ट साझा करते हुए मरीन ले पेन ने इसे एक ऐतिहासिक जीत और बड़ा मील का पत्थर करार दिया। उन्होंने लिखा, परिणाम हमारी सभी उम्मीदों से कहीं अधिक बेहतर रहे हैं; यह सफलता व्यापक है और पूरे देश में नेशनल रैली की बढ़ती लोकप्रियता पर मुहर लगाती है।

रविवार को सीनेट की लगभग आधी सीटों के लिए चुनाव संपन्न हुए थे। फ्रांस में सीनेट के सदस्य सीधे तौर पर आम जनता द्वारा नहीं चुने जाते हैं। इसके बजाय, इस अप्रत्यक्ष चुनाव में मुख्य रूप से स्थानीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों सहित लगभग 93,500 निर्वाचित अधिकारियों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अब तक इस उच्च सदन पर मुख्य रूप से रूढ़िवादी दलों का वर्चस्व रहा था और सत्ता में किसी बड़े बुनियादी बदलाव की उम्मीद नहीं की जा रही थी।

इससे पहले, रूढ़िवादी रिपब्लिकन पार्टी 131 सीटों के साथ सीनेट का सबसे बड़ा दल था, जबकि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन के खेमे के पास हाल ही में 19 सीटें थीं। वहीं, नेशनल रैली के पास पहले केवल तीन सीटें थीं, जो सीनेट में संसदीय समूह बनाने के लिए अनिवार्य 10 सीटों की न्यूनतम संख्या से काफी कम थीं। इस बार इस सुदूर-दक्षिणपंथी लोकलुभावन पार्टी को मिली सफलता में पूर्व रिपब्लिकन अध्यक्ष एरिक सियोटी के नेतृत्व वाले एक नए दक्षिणपंथी स्पींल्टर दल के समर्थन ने भी अहम भूमिका निभाई।

सीनेट में संसदीय समूह का दर्जा मिलने से अब नेशनल रैली को संसद के उच्च सदन में कई महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हो जाएंगे। इनमें सदन में बहस के दौरान बोलने का अधिक समय मिलना, सरकार से सीधे सवाल पूछना और सदन के एजेंडे को तय करने में भूमिका निभाना शामिल है।

यह चुनावी परिणाम मरीन ले पेन को अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के उनके अभियान के लिए मजबूत राजनीतिक बूस्ट प्रदान करेगा। कभी हाशिये पर रही नेशनल रैली ने आबादी के व्यापक वर्ग को लुभाने के लिए हाल के वर्षों में एक अधिक उदार और मध्यम रुख अपनाने की कोशिश की है। साल 2024 के आम चुनाव के बाद से ही यह पार्टी फ्रांस के निचले सदन यानी नेशनल राष्ट्रीय सभा में सबसे बड़ा संसदीय समूह बनी हुई है।

मरीन ले पेन पिछले कई महीनों से जनमत सर्वेक्षणों में सबसे आगे चल रही हैं, जिससे अगले साल होने वाले चुनाव के रन-ऑफ चरण में उनके पहुंचने की मजबूत संभावना है। हालांकि, उनका राष्ट्रपति बनना इस बात पर भी निर्भर करेगा कि अन्य राजनीतिक दलों से उनके सामने मुकाबला करने के लिए मैदान में कौन उतरता है।

फ्रांस की कॉर्ट ऑफ कैसेशन इस मामले में कितनी जल्दी फैसला सुनाती है, इसके आधार पर 58 वर्षीय ले पेन को चुनाव प्रचार के दौरान इलेक्ट्रॉनिक टैग पहनने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे उनकी आवाजाही की स्वतंत्रता सीमित हो सकती है। हालांकि, यदि वह राष्ट्रपति चुन ली जाती हैं, तो उन्हें कानूनी प्रतिरक्षा प्राप्त हो जाएगी और उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद ही सजा लागू की जा सकती है।