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संयुक्त राष्ट्र में गये पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का असहज भाव

हाफिज सईद के सवाल का कोई उत्तर नहीं दिया

न्यूयार्कः संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रवेश करते समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से दो मुद्दों पर सवाल पूछे गए, लेकिन वह बिना कोई जवाब दिए वहां से चले गए। एक पत्रकार ने उनसे पूछा, प्रधानमंत्री, आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे? इसके बाद, जब वह बाहर निकल रहे थे, तो उनसे पूछा गया, लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज़ सईद पर मुकदमा कब चलाया जाएगा? उन्होंने इनमें से किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा के रहने वाले हाफिज मुहम्मद सईद, गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत एक नामित आतंकवादी हैं और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हैं। सईद 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के मामले में एक आरोपी के रूप में वांछित है। हाल ही में, पाकिस्तान की  राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने भी आरोप लगाया है कि 22 अप्रैल 2025 को हुआ पहलगाम आतंकवादी हमला प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान स्थित गुर्गों द्वारा रचित था। हाफिज़ मुहम्मद सईद को एनआईए की पूरक चार्जशीट में आरोपी नंबर 8 के रूप में नामित किया गया है, जिसमें हमले के पीछे की बड़ी साजिश में उसकी संलिप्तता का आरोप लगाया गया है।

इससे एक दिन पहले, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला और इस्लामाबाद से कहा कि वह क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं रखने या सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने के बजाय बेलआउट पर जीवित रहने वाली कर्ज में डूबी अर्थव्यवस्था पर अपनी ऊर्जा केंद्रित करे।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अपने जवाब के अधिकार का उपयोग करते हुए, भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान की भटकाने वाली रणनीतियों की धज्जियां उड़ाईं और जोर देकर कहा कि इसका शत्रुतापूर्ण रवैया इसकी असफल वित्तीय प्रणाली को बचाने में कोई मदद नहीं करेगा।

एएनआई समाचार एजेंसी ने त्यागी के हवाले से कहा, पाकिस्तान अपने लोगों के विकास पर ध्यान केंद्रित करके उनकी बेहतर सेवा कर सकता है, न कि दूसरों की जमीन पर लालच रखकर या आतंकवाद का निर्यात करके, क्योंकि न तो ये और न ही परिषद में इसके ड्रामे उन कर्जों को चुकाने में मदद करेंगे जिन पर इसकी अर्थव्यवस्था जीवित है। त्यागी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की प्राथमिकताएं बुनियादी तौर पर गलत जगह पर हैं।

क्षितिज त्यागी ने इसके बाद इस्लामाबाद के गंभीर घरेलू पाखंड को उजागर किया, और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में नागरिकों के दमन और गंभीर मानवीय संकटों की ओर इशारा किया, जहां व्यापक विरोध प्रदर्शनों का सामना घातक राज्य हिंसा और भोजन, ईंधन व दवा जैसी आवश्यक आपूर्ति पर नाकाबंदी के साथ किया गया।