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बल्लेबाज टीम ही अंपायर चुन रही है

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति मामले में खंडित फैसला

जज ने क्रिकेट का रोचक उदाहरण दिया

मंत्री की मौजूदगी पर सवाल उठा

मामला अब संविधान पीठ के पास

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने बुधवार को चुनाव आयुक्तों (अंपायर) की नियुक्ति के विवाद पर टिप्पणी करते हुए क्रिकेट का उदाहरण दिया। 2023 के नियुक्ति कानून पर सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि इस तीन-सदस्यीय चयन समिति में प्रधानमंत्री, उनके द्वारा नामित एक मंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष शामिल हैं, जिससे सरकार के प्रभाव से मुक्त होने पर संदेह पैदा होता है।

उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी करने वाली टीम द्वारा चुना गया अंपायर, यदि सही फैसला भी दे, तो हमेशा संदेह के घेरे में रहता है क्योंकि उसे उसी टीम के प्रति वफादार माना जाता है। अपनी इस कानूनी दलील में उन्होंने खेल के प्रति अपने प्रेम को भी दर्शाया, क्योंकि वह सुप्रीम कोर्ट के जजों की क्रिकेट टीम के ओपनिंग बल्लेबाज हैं।

जस्टिस दत्ता ने प्रथम दृष्टया यह माना कि यह कानून एक स्वतंत्र चयन प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं करता है। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री द्वारा नामित मंत्री के प्रावधान पर सवाल उठाया और कहा कि ऐसा नामित व्यक्ति अपने ही चयनकर्ता का विरोध करने और अपनी स्थिति जोखिम में डालने का साहस नहीं जुटा सकता।

नरेंद्र मोदी सरकार ने पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर यह नया कानून बनाया था। उन्होंने कहा कि सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत भी मंत्री को प्रधानमंत्री का विरोध करने से रोकता है। ऐसे में, कैबिनेट मंत्री की मौजूदगी एक तटस्थ चयनकर्ता के रूप में स्वतंत्र संतुलन प्रदान करने में विफल रहती है।

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव एक स्वतंत्र चुनाव आयोग पर निर्भर करते हैं, जस्टिस दत्ता ने बुधवार को कहा। उन्होंने जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के साथ अपना खंडित फैसला सुनाते हुए यह बात कही। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ के पास भेजा जाए या नहीं, इस पर दोनों जजों में मतभेद था।

जस्टिस दत्ता का मानना था कि इस मुद्दे का समाधान पहले से तय सिद्धांतों से किया जा सकता है, जबकि जस्टिस शर्मा इसे बड़ी बेंच के पास भेजने के पक्ष में थे। इस असहमति के कारण, दो-जजों की बेंच ने मामले को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के पास भेज दिया है ताकि संविधान पीठ के गठन पर विचार किया जा सके।