Breaking News in Hindi

नाराज किसानों को फिर से समझाने में जुटे हैं केंद्रीय कृषि मंत्री

बीज विधेयक से किसानों को नुकसान नहीं होगाः चौहान

नईदिल्लीः केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को यहां बीज विधेयक और कीटनाशक प्रबंधन विधेयक के मसौदे पर करीब 20 किसान संगठनों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। श्री चौहान ने किसान संगठनों के नेताओं को आश्वस्त किया कि नरेंद्र मोदी सरकार किसानों के साथ व्यापक चर्चा और आम सहमति के आधार पर ही हर नीति को अंतिम रूप देगी।

बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए श्री चौहान ने कहा कि वर्तमान बीज अधिनियम बहुत पुराना है और यह अब समकालीन कृषि प्रणाली के अनुकूल नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय किसानों द्वारा उपयोग किए जाने वाले 70 प्रतिशत बीज मौजूदा अधिनियम के दायरे से बाहर हैं, इसलिए नकली बीजों के कारोबार पर नकेल कसना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने दोहराया कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और पारंपरिक बीजों का संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा, ट्रेसेबिलिटी सिस्टम (पता लगाने की व्यवस्था) से किसानों के लिए सही बीजों की पहचान करना काफी आसान हो जाएगा।

इस उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्र और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। बैठक में संघ परिवार से जुड़े भारतीय किसान संघ, सरकार के करीब माने जाने वाले भारतीय किसान यूनियन के विभिन्न गुटों, ऑल इंडिया किसान कोऑर्डिनेशन कमेटी, किसान महापंचायत और कई अन्य संगठनों के नेताओं ने इन विधेयकों पर अपने विचार रखे। कृषि मंत्री ने कहा कि घटिया कीटनाशकों की पहचान करने के लिए एक नए कीटनाशक प्रबंधन अधिनियम की भी आवश्यकता है।

मंत्री ने बताया कि उनके मंत्रालय को किसानों और किसान संगठनों से बीज विधेयक पर लगभग 18,000 सुझाव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि विचार-विमर्श की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और इसके लिए फिलहाल कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। यदि किसान और उनके संगठन और अधिक सुझाव देते हैं, तो सरकार उन पर विचार करेगी और उसके बाद ही आगे बढ़ेगी।

कृषि मंत्री ने यह बात मजबूती से रखी कि प्रस्तावित नया कानून किसानों के किसी भी अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसान अपने पारंपरिक और स्थानीय किस्म के बीजों का स्वतंत्र रूप से उपयोग करने, आपस में आदान-प्रदान करने और उन्हें बेचने में पूरी तरह सक्षम रहेंगे। पारंपरिक बीजों के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा, हालांकि यदि कोई किसान अपनी विकसित किस्म को पंजीकृत कराना चाहता है, तो उसके लिए स्वैच्छिक पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।