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यूरोपीय संघ में शामिल होने के प्रस्ताव को खारिज किया

आइसलैंड के मतदाताओं की वोटिंग का परिणाम

रिक्वाविकः आइसलैंड के मतदाताओं ने यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए बातचीत फिर से शुरू करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। रविवार को घोषित जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के परिणामों के अनुसार, 53 फीसद लोगों ने वार्ता के खिलाफ मतदान किया, जबकि 47 फीसद लोगों ने इसके पक्ष में अपनी सहमति व्यक्त की। कुल 68,135 वोट डाले गए और इस दौरान 82.4 फीसद भारी मतदान दर्ज किया गया।

आइसलैंड ने 2013 में देश में बैंकिंग संकट और वैश्विक आर्थिक मंदी के तुरंत बाद यूरोपीय संघ में शामिल होने पर चर्चा की थी। हालांकि, वह बातचीत बाद में रोक दी गई क्योंकि आइसलैंड के नागरिकों को अपने देश के मुख्य निर्यात क्षेत्र—मत्स्य पालन (फिशरीज)—पर संप्रभु नियंत्रण खोने की चिंता थी।

यदि मतदाताओं ने वार्ता की अनुमति दे भी दी होती, तो भी आइसलैंड स्वचालित रूप से यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं बनता। देश के प्रतिनिधियों को ब्रसेल्स के साथ औपचारिक बातचीत करनी होती और अंतिम सदस्यता के लिए आइसलैंड के मतदाताओं को दूसरे जनमत संग्रह में अपनी मंजूरी देनी पड़ती।

प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रोस्टाडॉटिर ने शनिवार को कहा, यह एक अच्छा दिन है। अब हम उस पड़ाव पर पहुंच गए हैं जहां यह फैसला पूरी तरह से राष्ट्र के हाथों में है। या तो हम इन वार्ताओं में प्रवेश करें, एक अच्छा समझौता हासिल करें और देखें कि आगे क्या होता है, या फिर हम यूरोपीय संघ की इस चर्चा को फिलहाल के लिए दरकिनार कर दें।

फ्रोस्टाडॉटिर ने ब्रिटिश पॉडकास्ट द रेस्ट इज पॉलिटिक्स में कहा था कि आइसलैंड वर्तमान में यूरोपीय संघ के लगभग 75 फीसद नियमों का पालन करता है। उस समय उन्होंने कहा था, यूरोपीय संघ में शामिल होने से देश डूबने नहीं वाला है और न ही इससे आइसलैंडिक अर्थव्यवस्था का हर पहलू बुनियादी रूप से बदलने वाला है। हालांकि, विरोधियों के बीच यह चिंता बनी रही कि यूरोपीय संघ के अन्य 27 देश आइसलैंड के हितों को दबा सकते हैं और देश को अपनी राष्ट्रीय मुद्रा क्रोना को छोड़कर यूरो अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।