कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को हटाने को कहा
पद का दुरुपयोग करने का आरोप
जज पद की सिफारिश में गड़बड़ी
हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में फेरबदल
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग, भाई-भतीजावाद और पक्षपात का आरोप लगाया है। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के प्रमुख के रूप में राज्य से बाहर के किसी मुख्य न्यायाधीश की तत्काल नियुक्ति की मांग की है। जस्टिस मेहता ने आरोप लगाया है कि जस्टिस शर्मा ने प्रभावशाली पक्षकारों को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का उपयोग करते हुए चुनिंदा मामलों को अपनी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराया। 10 अगस्त के अपने पत्र में जस्टिस मेहता ने दो मुख्य मामलों का उल्लेख किया। पहला मामला उदयपुर की बहुमूल्य जमीनों से जुड़ी अपीलों का था, जिन्हें पूर्व आदेशों के विपरीत जोधपुर से जयपुर पीठ में स्थानांतरित किया गया। इस मामले में एक पक्ष के वरिष्ठ वकील की बहू के नाम की सिफारिश हाई कोर्ट जज के रूप में करने का आरोप भी जस्टिस शर्मा पर लगाया गया है।
दूसरा मामला खनन व्यवसायी मेघराज सिंह से जुड़ी याचिका का था। आरोप है कि रजिस्ट्री में हेरफेर करके एक ऐसे मामले को विशेष अपील के रूप में पंजीकृत कराया गया, जो प्रक्रिया के तहत विचारणीय नहीं था। इसके बाद जस्टिस शर्मा की पीठ ने पहली ही सुनवाई में 457 दिनों की देरी को माफ करते हुए एकल पीठ के निर्देश पर रोक लगा दी। याचिकाकर्ता के वकील पूर्व में जस्टिस शर्मा के साथ काम कर चुके थे। जस्टिस मेहता ने इसे भ्रष्टाचार और शक्तियों का बेशर्म दुरुपयोग करार दिया।
17 अगस्त के पत्र में प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप भी बढ़ाए गए। जस्टिस मेहता ने हाईकोर्ट के साथी जज जस्टिस उमाशंकर व्यास का संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी (वरिष्ठ जिला न्यायिक अधिकारी) के प्रति जस्टिस शर्मा के प्रतिशोधात्मक व्यवहार पर दुख व्यक्त किया था। इसके अलावा, जोधपुर जिला अदालत (मेट्रो) की नई इमारत के उद्घाटन को एकतरफा रोकने का आरोप भी लगाया गया। बाद में जस्टिस मेहता और जस्टिस विजय विश्नोई के अनुरोध पर 15 अगस्त को सीजेआई द्वारा उस इमारत का उद्घाटन किया गया।