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सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बाद ईरान को मौका मिला

मक्का समझौते में ईरान को निमंत्रण की चर्चा

दमिश्कः सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए द्वारा हाल ही में गठित रक्षा गठबंधन—मक्का संयुक्त रक्षा समझौता में एक चौथा सदस्य भी शामिल हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान और रियाद के बीच दशकों पुरानी प्रतिद्वंद्विता और यमन के हूती आंदोलन से उसके संबंधों के बावजूद, ईरान को इस रक्षा समझौते में शामिल होने के लिए निमंत्रण मिला है।

लेबनान के समाचार चैनल अल-मयादीन की एक रिपोर्ट के हवाले से यह दावा किया गया है कि ईरानी संसद की खाना ए मल्लात समाचार एजेंसी के प्रमुख मेहदी रहीमी ने इस बात की जानकारी दी है। हालांकि, इस निमंत्रण की पुष्टि अभी तक न तो ईरान के विदेश मंत्रालय द्वारा और न ही सऊदी अरब, पाकिस्तान या तुर्किए की सरकारों द्वारा आधिकारिक तौर पर की गई है।

मेहदी रहीमी ने अल-मयादीन को बताया कि ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का निमंत्रण प्राप्त हुआ है और इस पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के देश एक साझा सुरक्षा छतरी की ओर बढ़ रहे हैं।

मक्का समझौता पर 7 अगस्त को हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर भी हुआ हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिडान ने इसकी तुलना नाटो के अनुच्छेद 5 से की है। पाकिस्तान ने इस बात के संकेत दिए हैं कि यह पहल अन्य देशों के लिए भी खुली है, जिसके चलते मिस्र और बांग्लादेश जैसे देशों के भी इसमें शामिल होने को लेकर कूटनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

दूसरी तरफ इस बात की भी अनौपचारिक चर्चा होने लगी है कि बांग्लादेश भी इस समझौते में शामिल होने को उत्सुक है। अब तक आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे पर बांग्लादेश की सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आने के बाद भी चर्चा का सामने आया यह संकेत देता है कि वहां भी कोई कूटनीतिक खिचड़ी पक रही है।