रांची (झारखंड): झारखंड में चालू मानसून सीजन की शुरुआत भले ही कमजोर रही हो और किसानों की चिंता बढ़ा रही थी, लेकिन अगस्त माह में मौसम का मिजाज बदलने से स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है।
मौसम विभाग (IMD) द्वारा 1 जून से 19 अगस्त तक जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बारिश का कुल डेफिसिट (कमी) अब घटकर केवल 10 प्रतिशत रह गया है। इस अवधि के दौरान राज्य में कुल 633.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस समयावधि के लिए सामान्य वर्षा का औसत 700.5 मिलीमीटर माना जाता है।
📈 इन जिलों में सामान्य से अधिक बारिश: पश्चिमी सिंहभूम रहा सबसे आगे
राज्य के कई जिलों में बादलों ने अच्छी वर्षा की है, जिससे आंकड़े सामान्य से ऊपर पहुंच गए हैं:
-
पश्चिमी सिंहभूम: सामान्य से 48 प्रतिशत अधिक वर्षा के साथ राज्य में शीर्ष पर।
-
खूंटी: सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज।
-
सरायकेला-खरसावां: सामान्य से 9 प्रतिशत अधिक।
-
सिमडेगा: सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक।
-
रांची: सामान्य से 7 प्रतिशत अधिक।
-
लातेहार एवं पूर्वी सिंहभूम: लातेहार में 4 प्रतिशत तथा पूर्वी सिंहभूम में 1 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, जबकि लोहरदगा में आंकड़े सामान्य के करीब रहे हैं।
⛅ इन 5 जिलों में सामान्य से थोड़ी कम वर्षा, पर सूखे का खतरा नहीं
कुछ जिलों में बारिश में आंशिक कमी दर्ज की गई है, परंतु यह 20 प्रतिशत के दायरे के भीतर होने से स्थिति सामान्य श्रेणी के आसपास बनी हुई है:
-
धनबाद: 7 प्रतिशत की कमी।
-
दुमका एवं रामगढ़: दोनों जिलों में 14-14 प्रतिशत की कमी।
-
जामताड़ा: 18 प्रतिशत की कमी।
-
साहिबगंज: 19 प्रतिशत की कमी।
⚠️ 11 जिलों में 20% से अधिक बारिश की कमी: पाकुड़ में स्थिति सबसे गंभीर
राज्य के 11 जिलों में मानसून की बेरुखी से कृषि कार्य प्रभावित हुए हैं, जहां सामान्य से 20 प्रतिशत या उससे अधिक की कमी है:
-
पाकुड़: सामान्य से 53 प्रतिशत कम बारिश (राज्य में सबसे कमजोर स्थिति)।
-
चतरा, देवघर व गढ़वा: चतरा में 47%, देवघर में 46% और गढ़वा में 46% की भारी कमी।
-
कोडरमा व गिरिडीह: कोडरमा में 44% और गिरिडीह में 36% की कमी।
-
हजारीबाग, पलामू, गोड्डा व बोकारो: हजारीबाग में 30%, पलामू में 29%, गोड्डा में 28% और बोकारो में 24% कम वर्षा हुई है।
-
गुमला: सामान्य से 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
📅 जून में सुस्त शुरुआत, जुलाई में रिकवरी और अगस्त में बरसे राहत के बादल
मानसून 2026 के पूरे चक्र का विश्लेषण इस प्रकार रहा:
-
जून (कमजोर शुरुआत): दक्षिण-पश्चिम मानसून राज्य में प्रवेश तो कर गया, लेकिन शुरुआती रफ्तार सुस्त रहने के कारण जून माह में वर्षा बेहद कम रही।
-
जुलाई (डिप्रेशन और आंशिक सुधार): जुलाई के शुरुआती दिनों में (विशेषकर 6 जुलाई को) दक्षिण झारखंड और उत्तरी आंतरिक ओडिशा के ऊपर डिप्रेशन बनने से कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई।
-
अगस्त (सक्रिय मानसून): अगस्त में मानसूनी गतिविधियों के तेज होने से राज्य का ओवरऑल रेन डेफिसिट तेजी से घटा और खेती-किसानी को नई ऊर्जा मिली।