मोदी की फेसबुक रील हटाने पर मोदी सरकार कठोर
सांसद निशिकांत दुबे ने जानकारी दी
संबंधित विभागों को सिफारिश भेजी है
छात्र आंदोलन के दौरान हुई थी गड़बड़ी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर अपनी इस मांग को दोहराया है कि मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्थापक मार्क जुकरबर्ग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक रील को अस्थायी रूप से हटाए जाने के मामले में तीन दिन के भीतर माफी मांगें। समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने बुधवार को यह बात कही। संसद में पत्रकारों से बात करते हुए दुबे ने कहा कि मेटा और अन्य प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ इस सप्ताह की शुरुआत में हुई बैठक के बाद समिति ने अपनी बात दोनों मंत्रालयों तक पहुंचा दी है।
दुबे ने कहा, संसदीय समिति ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि प्रधानमंत्री के वीडियो को हटाना एक इंटरमीडियरी (मध्यस्थ) की भूमिका नहीं बल्कि एक पब्लिशर (प्रकाशक) की भूमिका थी। इसलिए, मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन के भीतर माफी मांगनी चाहिए। यदि वह ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो मेटा को दी गई सुरक्षित आश्रय सुरक्षा वापस ले ली जाएगी।
नवीनतम बयान समिति द्वारा सोमवार की बैठक में अपनाए गए रुख को आगे बढ़ाते हैं, जहां दुबे ने सबसे पहले जुकरबर्ग से माफी की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि प्रधानमंत्री के वीडियो को अस्थायी रूप से हटाना एक तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका से परे के आचरण को दर्शाता है।
यह विवाद 23 जुलाई को पीएम मोदी द्वारा पोस्ट किए गए एक फेसबुक रील को मेटा द्वारा थोड़े समय के लिए हटाए जाने से उपजा है। इस रील में उन्होंने नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर बात की थी और परीक्षा पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा का प्रावधान करने वाले प्रस्तावित कानून सहित कई उपायों की घोषणा की थी। यह वीडियो बहाल किए जाने से पहले 28 जुलाई को लगभग पांच घंटे तक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं था।