चीनी ड्रेगन ने फिर से अपनी गंदी चाल चल दी है
तिब्बती पुनर्जन्म की राजनीति की चाल है
दलाई लामा के यहां होने से परेशानी कायम
बच्चों की तस्करी और धमकियां पर बोले पेमा खांडू
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी: चीन सरकार एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश के लगभग 90,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर अपना बेबुनियाद दावा कर रही है, जिसे वह ‘जांगनान’ कहती है। भारत ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है। चीन अक्सर इस क्षेत्र के स्थानों के कृत्रिम नाम जारी कर अपनी कुत्सित चालें चलता रहता है। हाल ही में चीन के ‘जातीय एकता कानून’ और दलाई लामा के उत्तराधिकार पर उसकी अनावश्यक टिप्पणी ने वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। इन रणनीतियों का उद्देश्य तिब्बती संस्कृति और पहचान को मिटाकर उसे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एजेंडे में शामिल करना है।
इन बाहरी चुनौतियों के बीच, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने तवांग में ‘नॉर्थ ईस्ट स्टेट कमीशन्स फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एससीपीसीआर) कन्वेंशन 2026’ के दौरान बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने तस्करी, ऑनलाइन शोषण और नशीले पदार्थों जैसी सीमा-पार चुनौतियों से निपटने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों के बीच मजबूत तालमेल का आह्वान किया। खांडू ने कहा कि किसी भी सरकार की सफलता का वास्तविक पैमाना अपने सबसे कमजोर नागरिकों, यानी बच्चों की सुरक्षा है।
अरुणाचल सरकार ने बच्चों और महिलाओं के कल्याण के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं। ‘दुलारी कन्या योजना’ से लेकर ‘गर्ल्स हेल्थ एंड हाइजीन स्कीम’ तक, राज्य सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश कर रही है। मिशन वात्सल्य के तहत हजारों बच्चों को वित्तीय सहायता और स्पॉन्सरशिप दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें स्कूलों, परिवारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का साथ अनिवार्य है।
क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए, उपमुख्यमंत्री चौना मेन ने गुवाहाटी में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। दोनों राज्यों के बीच कनेक्टिविटी और सामाजिक-आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। कुल मिलाकर, अरुणाचल प्रदेश एक ओर चीन की विस्तारवादी नीतियों का मजबूती से सामना कर रहा है, तो दूसरी ओर अपने नागरिकों के बेहतर भविष्य और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अंतर-राज्यीय सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है।