स्पेन के सेउटा का प्रवासन संकट देख इटली की कार्रवाई
रोमः स्पेन के सेउटा क्षेत्र में उत्पन्न हुए भीषण प्रवासन संकट के मद्देनजर, इटली ने शुक्रवार को स्पेन के साथ अपनी सीमाओं को बंद करने का कड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत, दोनों देशों के बीच मुक्त आवाजाही से संबंधित समझौते को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। यह संकट तब गहरा गया जब महज 24 घंटों के भीतर लगभग 60,000 लोग सीमा पार कर इस छोटे से उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव में पहुँच गए, जिससे वहाँ की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गई।
संकट की जड़ और मानवीय त्रासदी यह स्थिति स्पेन के सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया फैसले के बाद पैदा हुई, जिसमें कहा गया था कि स्पेन उन प्रवासियों को वापस नहीं भेज सकता जो स्पेनिश क्षेत्र में पहुँच जाते हैं। इस कानूनी स्थिति का लाभ उठाकर भारी संख्या में लोग वहाँ पहुँचने लगे। इस दौरान मोरक्को से सेउटा की सीमा पार करने के प्रयास में लगभग 57 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें से अधिकांश ने बाड़ लांघने या तैरकर पहुँचने का जोखिम उठाया था।
इटली के आंतरिक मंत्रालय ने शेंगेन समझौते को अस्थायी रूप से रद्द कर दिया है। उप-प्रधानमंत्री एंटोनियो ताजानी ने एक्स पर एक बयान जारी कर कहा, अपने नागरिकों की सुरक्षा और यूरोपीय सीमाओं की रक्षा के लिए यह एक अनिवार्य कदम है। उन्होंने जोर दिया कि सेउटा का संकट यह याद दिलाता है कि यूरोपीय संघ की सीमाओं का प्रबंधन सभी सदस्य देशों की साझा जिम्मेदारी है। इटली का मानना है कि अनियंत्रित प्रवासन से आतंकवाद और अन्य सुरक्षा जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
स्पेन की स्थिति और प्रतिक्रिया शुक्रवार दोपहर तक लगभग 48,000 प्रवासियों को वापस मोरक्को भेज दिया गया है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने सेउटा का दौरा किया और इस घटना को स्पेन की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करार दिया। वर्तमान में, सेउटा की सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है और निवासी घरों में रहने को मजबूर हैं। हालांकि, किसी भी प्रवासी के अभी तक स्पेन या यूरोप के अन्य हिस्सों में जाने की पुष्टि नहीं हुई है। प्रधानमंत्री सांचेज़ ने इटली के सीमा बंद करने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बंटवारे का समय नहीं है।