Jharkhand News: पश्चिमी सिंहभूम में चमत्कार, मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला इलाज के बाद सकुशल अपने घर पहुंची
चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला के कुमारडुंगी प्रखंड के बड़ाजामबनी गांव में बुधवार को एक ऐसा अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर एक शख्स की आंखें नम कर दीं. करीब सात साल पहले लापता हुई एक महिला अचानक अपने घर वापस लौट आई. परिवार के लोगों ने, जिन्होंने वर्षों पहले ही उसे मृत मान लिया था, अचानक उसे अपने सामने जीवित देखकर अपनी खुशी के आंसू रोक नहीं पाए. मां को सालों बाद सामने देखकर उनके तीनों बच्चे और पति उनसे लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़े.
🏚️ मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण 7 साल पहले घर से चली गई थीं चंदू सिरका
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़ाजामबनी गांव निवासी राजेंद्र सिरका की पत्नी चंदू सिरका करीब सात वर्ष पूर्व मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण किसी को कुछ बताए बिना अचानक घर से कहीं चली गई थीं. परिवार और रिश्तेदारों ने कई वर्षों तक उनकी खूब तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला. समय बीतने के साथ परिवार और पूरे समाज ने उन्हें मृत मान लिया था. यहां तक कि सामाजिक परंपराओं के अनुसार उनके अंतिम संस्कार और शुद्धिकरण की तैयारियां भी शुरू कर दी गई थीं, लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से वह कार्यक्रम टलता चला गया.
🏥 भटकते-भटकते छत्तीसगढ़ और नागपुर पहुंचीं, इलाज के बाद लौटी याददाश्त
बताया जा रहा है कि भटकते-भटकते चंदू सिरका छत्तीसगढ़ के बिलासपुर पहुंच गई थीं. वहां एक सामाजिक संस्था के समर्पित कार्यकर्ताओं ने उनकी मानसिक स्थिति को भांपते हुए उन्हें अपने संरक्षण में लिया और उनके इलाज की समुचित व्यवस्था कराई. इसके बाद बेहतर उपचार के लिए उन्हें महाराष्ट्र के नागपुर भेजा गया. लंबे इलाज के बाद जब उनकी मानसिक स्थिति पूरी तरह सामान्य हुई, तो उन्होंने अपना नाम और झारखंड स्थित अपने गांव का सही पता बताया. इसके बाद संस्था ने चक्रधरपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) से संपर्क साधा. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए विभिन्न थानों की मदद से उनकी पहचान की पुष्टि की और कुमारडुंगी थाना के सहयोग से उन्हें पूरी सुरक्षा के साथ उनके परिवार तक पहुंचा दिया.
✨ पति और बच्चों से लिपटकर रोईं महिला, परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है यह वापसी
घर पहुंचते ही चंदू सिरका अपने पति और बच्चों से लिपटकर फफक-फफक कर रोने लगीं. वर्षों तक मां के आंचल और स्नेह से वंचित रहे बच्चों की आंखों से भी खुशी के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. स्थानीय ग्रामीणों ने इस सराहनीय मानवीय पहल के लिए पुलिस प्रशासन और मददगार सामाजिक संस्था का आभार जताया है. महिला के पति राजेंद्र सिरका ने भर्राए गले से बताया कि पत्नी के लापता होने के वक्त उनका सबसे छोटा बेटा बहुत छोटा था. पत्नी के बिना तीनों बच्चों की परवरिश करना उनके लिए एक कठिन चुनौती थी, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने कहा कि सात साल बाद पत्नी का इस तरह जिंदा लौट आना उनके पूरे परिवार के लिए किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं है, और यह घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.