इससे समूचे महासागरीय प्लेट का भूगोल बदला था
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भूगर्भस्थ आंकड़ों से इसकी पुष्टि हुई
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दूसरे इलाकों से यहां की संरचना भिन्न
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बहुत सारा मैग्मा अंदर से बाहर आया था
राष्ट्रीय खबर
रांचीः वैज्ञानिकों ने एक अभूतपूर्व भूगर्भीय खोज में यह पता लगाया है कि पृथ्वी के इतिहास की सबसे विशाल और चरम ज्वालामुखी घटनाओं में से एक ने न केवल समुद्र के भीतर एक विशाल पठार का निर्माण किया, बल्कि उसके नीचे स्थित महासागरीय प्लेट की आंतरिक संरचना और रासायनिक संरचना को भी स्थायी रूप से बदल दिया। यह खोज जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स पत्रिका में प्रकाशित हुई है, जिसने वैश्विक वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
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टोक्यो इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर अकीरा इशिकावा और हिरोशिमा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मसाको योशिकावा के सहयोग से ओकायामा यूनिवर्सिटी ऑफ साइंसेज के व्याख्याता अजुसा शितो के नेतृत्व में एक जापानी अनुसंधान दल ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है। वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर में स्थित दुनिया के सबसे बड़े महासागरीय पठार, ओंटोंग जावा प्लेटू के नीचे की गहरी संरचना की जांच करने के लिए उन्नत भूकंपीय तरंगों का उपयोग किया। उनके निष्कर्ष बताते हैं कि करोड़ों वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में अत्यधिक मात्रा में मैग्मा मौजू़दा प्लेट के बीच से ऊपर की ओर उमड़ा, जिसने न केवल ऊर्ध्वाधर रास्तों का एक जटिल जाल बनाया, बल्कि आसपास की चट्टानों को भी रासायनिक रूप से रूपांतरित कर दिया।
जटिल आंतरिक संरचना और प्राचीन मैग्मा मार्ग आमतौर पर एक सामान्य महासागरीय प्लेट की संरचना को काफी सरल और सीधा माना जाता है, लेकिन ओंटोंग जावा प्लेटू के नीचे ऐसा नहीं है। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस प्लेट का आंतरिक हिस्सा बेहद जटिल है, जो क्षैतिज परतों और उन्हें काटते हुए ऊर्ध्वाधर मैग्मा मार्गों के नेटवर्क से मिलकर बना है। इन ऊर्ध्वाधर आकृतियों को भूविज्ञान में डाइक कहा जाता है। डाइक तब बनते हैं जब पिघली हुई चट्टानें यानी मैग्मा, दरारों के माध्यम से बलपूर्वक ऊपर की ओर बढ़ता है और फिर उन्हीं के भीतर ठंडा होकर ठोस रूप ले लेता है। इन अंतःक्षेपों के बड़े समूहों को डाइक स्वार्म्स कहा जाता है, जो सदियों बाद भी तीव्र ज्वालामुखी गतिविधि का एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने भीतर संजोकर रखते हैं।
सीस्मिक तरंगों से खुला रासायनिक बदलाव का राज इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने ओंटोंग जावा प्लेटू के आसपास और नजदीकी द्वीपों पर स्थापित ओशन बॉटम सीस्मोमीटर द्वारा दर्ज उच्च आवृत्ति वाले भूकंपीय संकेतों, जिन्हें पीओ और एसओ तरंगें कहा जाता है, का बारीकी से अध्ययन किया। सामान्य परिस्थितियों में ये तरंगें महासागरीय प्लेटों के भीतर बार-बार परावर्तित होकर हजारों किलोमीटर की यात्रा तय करती हैं। लेकिन इस क्षेत्र में इन तरंगों की गति असामान्य रूप से धीमी पाई गई। विशेष रूप से, पीओ तरंगें तो कुशलता से आगे बढ़ गईं, लेकिन एसओ तरंगें अत्यधिक कमजोर हो गईं।
इस विसंगति के वेवफॉर्म मॉडलिंग से स्पष्ट हुआ कि पृथ्वी के मेंटल की गहराई से उठने वाले मैग्मा ने केवल इस प्लेट को पार नहीं किया, बल्कि इसके साथ प्रतिक्रिया भी की। वैज्ञानिकों के अनुसार, एक अत्यंत गर्म थर्मोकेमिकल प्लम के कारण हुए इस महाविस्फोट के मैग्मा ने प्राचीन चट्टानों को रासायनिक रूप से समृद्ध किया, जिसे भूविज्ञान में रेफर्टिलाइजेशन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में मैग्मा ने मेंटल की पेरिडोटाइट चट्टानों को उन रासायनिक तत्वों को वापस लौटा दिया, जो पहले कभी आंशिक पिघलने के दौरान नष्ट हो गए थे। यह खोज पृथ्वी के आंतरिक रहस्यों और महासागरीय प्लेटों के विकास को समझने की दिशा में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर है।
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