रूसी तेल खरीद पर सौ फीसद अमेरिकी टैरिफ पर बवाल
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः कांग्रेस पार्टी ने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह द्वारा पेश किए गए एक नए विधेयक पर केंद्र सरकार की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। इस प्रस्तावित अमेरिकी कानून में रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने के लिए भारत सहित पांच देशों से होने वाले आयात पर 100% तक दंडात्मक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है।
दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल द्वारा तैयार किए गए इस विधेयक के निशाने पर भारत के अलावा चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान भी हैं, जो वर्तमान में रूसी तेल के शीर्ष पांच खरीदार हैं। हालांकि, इस कानून में उन 15 यूरोपीय देशों को छूट दी गई है जो अभी भी रूसी प्राकृतिक गैस का आयात कर रहे हैं। अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि इन यूरोपीय देशों की गैस खरीद उनकी कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बहुत छोटा हिस्सा है और वे धीरे-धीरे मॉस्को पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं।
इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार की चुप्पी और नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। खेड़ा ने लिखा, ये कोई आम हाउस डेमोक्रैट्स नहीं हैं। ये रिपब्लिकन सीनेटर हैं, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त है, और वे रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर 100 फीसद टैरिफ लगाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत द्वारा अपने राष्ट्रीय ऊर्जा हितों की रक्षा करने के प्रयासों के बावजूद उसे इस तरह के दंडात्मक प्रतिबंधों की धमकियों से वैश्विक मंच पर अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि पीयूष गोयल को तुरंत देश के सामने इसके गंभीर आर्थिक और व्यापारिक परिणामों को स्पष्ट करना चाहिए।
यह विधेयक यदि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो यह अमेरिकी कांग्रेस के इतिहास में पहला ऐसा उदाहरण होगा जहां भू-राजनीतिक हथियार के रूप में किसी दूसरे देश के युद्ध प्रयासों को वित्तपोषित करने के आरोप में टैरिफ का खुलकर उपयोग किया जाएगा। यह कदम पहले के एक प्रस्ताव (जिसमें 500 फीसद टैरिफ की बात थी) का संशोधित और व्यावहारिक रूप है, जो भारत के लिए एक बड़ी ऊर्जा चुनौती बन सकता है क्योंकि वर्तमान में भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रूस से रियायती दरों पर आयात कर रहा है।