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भाजपा पार्षदों के शपथ ग्रहण को अवैध ठहरा दिया अदालत ने

सिर्फ ईश्वर अथवा सत्यनिष्ठा की शपथ लेः केरल हाईकोर्ट

  • माकपा नेता ने दायर की थी याचिका

  • संविधान के अनुसार ही शपत लेना होगा

  • भाजपा ने कहा आदेश का पालन भी होगा

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः केरल उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट कर दिया है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को कानून द्वारा निर्धारित शपथ के प्रारूप में किसी भी प्रकार का बदलाव करने या उसे विस्तारित करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि शपथ लेते समय विशिष्ट देवी-देवताओं, राजनीतिक शहीदों, संगठनों या सार्वजनिक हस्तियों के नाम का आह्वान करना कानून की मंशा के विरुद्ध है। न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हिकृष्णन ने यह टिप्पणी तब की जब उन्होंने उन निर्वाचित पार्षदों की शपथ को अमान्य घोषित कर दिया, जिन्होंने संवैधानिक और वैधानिक नियमों का उल्लंघन करते हुए शपथ के दौरान स्वेच्छा से अन्य नाम जोड़ लिए थे।

यह विवाद छह महीने पुराना है, जब तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने शपथ ग्रहण समारोह को अपने विश्वास और राजनीति के प्रदर्शन का मंच बना लिया था। इन पार्षदों ने अपनी शपथ में भारत माता, अट्टुकल देवी, गुरुदेवन और आरएसएस के शहीदों का नाम जोड़ दिया था। उच्च न्यायालय का यह फैसला भाजपा प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिसने पिछले साल दिसंबर में पहली बार इस स्थानीय निकाय पर कब्जा किया था।

न्यायालय के फैसले के अनुसार, यदि कोई शपथ किसी कानून (स्टैच्यूट) के अंतर्गत आती है, तो कोई भी व्यक्ति उसमें न तो कुछ जोड़ सकता है और न ही किसी हिस्से को प्रतिस्थापित कर सकता है। केरल नगरपालिका अधिनियम, 1994 और केरल पंचायत राज अधिनियम, 1994 स्पष्ट रूप से प्रावधान करते हैं कि निर्वाचित सदस्यों को या तो ईश्वर के नाम पर शपथ लेनी चाहिए या फिर सत्यनिष्ठा के साथ प्रतिज्ञान (अफर्मेशन) करना चाहिए। न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की, हमें ईश्वर को नाम से विस्तारित करने की आवश्यकता नहीं है। सर्वशक्तिमान सभी का भला करे! मैं इसे यहीं छोड़ता हूँ।

यह मामला सीपीआई (एम) के संसदीय दल के नेता दीपक एस.पी. द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। प्रतिवादियों ने तर्क दिया था कि वे विशिष्ट व्यक्तियों और देवी-देवताओं को ही अपना ईश्वर मानते हैं, लेकिन न्यायालय ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने पलक्कड़ के वड़ककेन्चेरी में एक ग्राम पंचायत पार्षद की शपथ को भी अमान्य कर दिया, जिन्होंने पूर्व कांग्रेस मुख्यमंत्री ओमन चांडी के नाम पर शपथ ली थी। न्यायालय ने नगर निगम को चार सप्ताह के भीतर पार्षदों के लिए पुन: शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने का निर्देश दिया है। मेयर वी.वी. राजेश ने स्पष्ट किया है कि भाजपा न्यायालय के इस आदेश का पूर्णतः पालन करेगी।