नारायणपुर: नारायणपुर जिले में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) शाखा के साथ हुए करोड़ों के आर्थिक अपराध में पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। फर्जी केवाईसी, कूटरचित दस्तावेजों और निष्क्रिय बैंक खातों का दुरुपयोग कर 30 लाख 67 हजार 500 रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के तीन और आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे बैंकिंग नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।
🕵️ क्या है पूरा फर्जीवाड़ा?
यह मामला 5 फरवरी 2026 को बैंक शाखा प्रबंधक मनीष कुमार सोनी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद सुर्खियों में आया। बैंक की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे:
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बैंक कर्मचारी गोपाल सिंह समुंद ने रिकवरी एजेंट और बीसी सेंटर संचालकों के साथ मिलकर एक सुनियोजित जाल बिछाया।
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वर्षों से निष्क्रिय पड़े खातों को मामूली राशि जमा कर सक्रिय किया गया।
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खाताधारकों की जानकारी के बिना आधार लिंकिंग और फर्जी दस्तावेजों से 18 खातों से लगभग 8.92 लाख रुपये और कुल मिलाकर 30.67 लाख रुपये की अवैध निकासी की गई।
💸 बीसी सेंटरों का हुआ दुरुपयोग
पुलिस की विवेचना में यह स्पष्ट हुआ है कि धोखाधड़ी की रकम को अलग-अलग बीसी (BC) सेंटरों के जरिए निकाला गया। तिलकराम मंडावी के बीसी सेंटर से 6.27 लाख और रामकरण साहू के सेंटर से 15.47 लाख रुपये की अवैध निकासी के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा कई लेन-देन आरोपियों के व्यक्तिगत और परिचितों के खातों में ट्रांसफर किए गए।
⚖️ अब तक की पुलिस कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई की है।
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पूर्व गिरफ्तारी: गोपाल सिंह समुंद और तिलकराम मंडावी को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
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नई गिरफ्तारी (23 जून 2026): पुलिस ने अशोक जैन, सुनैना समुंद और रामकरण साहू को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों के पास से बैंक पासबुक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है, और पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने के लिए जांच कर रही है।