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ईरान अमेरिका समझौते पर इजरायल का पेंच फंसा है

लेबनान से इजरायली सैनिकों की वापसी की शर्त

एजेंसियां

तेहरानः ईरान और अमेरिका के बीच हालिया समझौते की प्रक्रिया के बीच पश्चिम एशिया में तनाव एक नए मोड़ पर है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह तब तक किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा, जब तक कि लेबनान से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी सुनिश्चित नहीं हो जाती।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने मंगलवार को विदेशी राजनयिकों के समक्ष आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो टूक शब्दों में कहा कि लेबनान में युद्ध का अंत व्यापक शांति का अभिन्न हिस्सा है। अरागची ने चेतावनी दी कि इजरायल द्वारा कब्जे वाले क्षेत्रों से सैनिकों को हटाए बिना युद्ध को पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में लेबनान पर कोई भी सैन्य हमला या इजरायली सेना की उपस्थिति को ईरान इस समझौते का उल्लंघन मानेगा।

समझौते के बावजूद जमीनी हालात बेहद जटिल बने हुए हैं। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी एनएनए के अनुसार, मंगलवार को दक्षिण लेबनान के नबातीह इलाके में इजरायली ड्रोन हमलों में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई। मयफादौन और शुकीन शहरों में वाहनों को निशाना बनाकर किए गए इन हमलों ने समझौते की नाजुक स्थिति को उजागर कर दिया है।

हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद हिंसा में कमी आई है, लेकिन सोमवार से अब तक हुए हमलों में पांच लोगों की जान जा चुकी है। इजरायल का रुख ईरान की मांगों के विपरीत है; राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप का समझौता हमें बाध्य नहीं करता और इजरायली सेना दक्षिण लेबनान में बनी रहेगी।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस समझौते को एक महत्वपूर्ण कदम तो बताया है, लेकिन साथ ही आगाह किया कि अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। उन्होंने तस्नीम न्यूज एजेंसी से कहा कि ईरान किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। दूसरी ओर, अमेरिका के साथ शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले समझौते को लेकर बातचीत जारी है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर भी चर्चा होनी है। इस बीच, एक सकारात्मक संकेत के तौर पर, ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रावंची ने पुष्टि की है कि पिछले दो महीनों से जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को औपचारिक हस्ताक्षर से पहले ही हटा लिया गया है।