World Blood Donor Day: रक्तदान को ‘उत्सव’ की तरह मना रहे युवा; हजारीबाग से गोड्डा तक रक्तदान शिविरों में उमड़ा उत्साह
हजारीबाग/कोडरमा/गोड्डा: 14 जून को ‘विश्व रक्तदाता दिवस’ के मौके पर झारखंड के विभिन्न जिलों में रक्तदान के प्रति अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। युवा अब रक्तदान को केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक उत्सव के रूप में देख रहे हैं। पहली बार रक्तदान करने वाले युवाओं की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि समाज से रक्त के प्रति पुराने अंधविश्वास और डर अब पूरी तरह खत्म हो रहे हैं।
🌟 87वीं बार रक्तदान कर रितेश माधव ने पेश की मिसाल
कोडरमा में 45 वर्षीय रितेश माधव एक प्रेरणा बनकर उभरे हैं। उन्होंने अब तक 87 बार रक्तदान कर कई जरूरतमंदों की जान बचाई है। साल 2000 में पहली बार रक्तदान करने के बाद से ही वे हर 3 से 4 महीने के अंतराल पर नियमित रूप से रक्तदान कर रहे हैं। रितेश का लक्ष्य 101 बार रक्तदान करने का है। वे लोगों को संदेश देते हैं कि रक्तदान का शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि यह एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है।
📋 स्वास्थ्य मंत्री के बयान से गहराया संकट
गोड्डा में रक्तदान शिविर के दौरान स्वयंसेवी संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के बयान का कड़ा विरोध किया। मंत्री ने कहा था कि ‘ब्लड के बदले ब्लड’ लेने की व्यवस्था बंद की जाएगी। सामाजिक संस्थाओं का कहना है कि इस बयान के बाद रक्तकोष (ब्लड बैंक) में खून की आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा है, जिससे कैंसर और थैलेसीमिया जैसे मरीजों के लिए रक्त जुटाना कठिन हो गया है।
🤝 रक्तदान वीरों का सम्मान
इस चुनौतीपूर्ण समय में भी रेड क्रॉस सोसाइटी और लायंस क्लब जैसी संस्थाएं लगातार लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रही हैं। गोड्डा में शिविर के दौरान स्वेच्छा से रक्तदान करने वाले ‘रक्तदान वीरों’ को पुष्प देकर सम्मानित किया गया। जिला आपूर्ति पदाधिकारी मुरली यादव ने युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि नई पीढ़ी का आगे आना स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है।